आगरालीक्स…आगरा में बिना अधिकारियों के हो गया सदन, नगर निगम के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा.. पार्षदों ने नगरायुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव किया पारित. रोष और हंगामा
नगर निगम आगरा के इतिहास में सोमवार को पहली बार ऐसा हुआ जब बिना अधिकारियों के ही नगर निगम अधिवेशन की बैठक संपन्न हो गई। इस पर पार्षदों ने जमकर रोष व्यक्त किया और सदन कक्ष में जमकर हंगामा करने के बाद नगरायुक्त अंकित खंडेलवा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करके महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा को सौंपा दिया। सदन की अध्यक्षता कर रहीं महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने कहा कि नगर निगम में अधिकारी सरकार खिलाफ काम कर रहे हैं। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री दूंगी।
असमंजस की स्थिति में सोमवार को हुई सदन की बैठक में पार्षद और महापौर समय से पहुंच गए। आधा घंटा इंतजार करने के बाद जब कोई भी अधिकारी सदन कक्ष में नहीं पहुंचा तो सदन की कार्रवाई को शुरू किया गया। इस दौरान पार्षदों ने जमकर रोष व्यक्त किया और नगर निगम आगरा में अधिकारियों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अधिकारियों की गैर-मौजूदगी के कारण पार्षदों द्वारा कोई भी विकास कार्य को लेकर प्रस्ताव पेश नहीं किए जा सके।
सदन की बैठक से क्यों डर रहे हैं नगरायुक्त: मेयरमहापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने सदन कक्ष में मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि पूर्व में भी नगरायुक्त द्वारा सदन की बैठक प्रभावित किए जाने प्रयास किए गए हैं। इससे पूर्व दिनांक 07/03/2026 को सदन की बैठक निर्धारित थी, जिसके लिए नगरायुक्त को पहले ही पत्र लिखकर निर्देशित किया जा चुका था,लेकिन 06/03/2026 तक पार्षदों को कोई सूचना जारी नहीं की गई थी। सौभाग्य की बात यह रही कि मुख्यमंत्री जी का दौरा 07/03/2026 को प्रस्तावित हो गया। इसके बाद दिनांक 09/03/2026 को नगरायुक्त को सदन की बैठक 23/03/2026 को आहूत करने के लिए पत्र लिखा गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 22/03/2026 तक पार्षदों को कोई भी एजेंडा या सूचना जारी नहीं की गई। नगरायुक्त सदन की बैठक से बचना क्यों चाह रहे हैं यह अब तक समझ नहीं आ रहा? इस सबंध में मेरे द्वारा दिनांक 22/03/2026 को मंडलायुक्त जी से बैठक करके चर्चा की और जिलाधिकारी को भी सूचित किया। उन्होंने भी नगरायुक्त द्वारा किए जा रहे इस व्यवहार की निंदा की।

महापौर ने कहा कि सदन में पार्षद भी हैं और मैं भी हूं लेकिन यहां एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। मुझे बताते हुए खेद हो रहा है कि आगरा नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार है, जब सदन की बैठक के दौरान नगर निगम का एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। नगर निगम के सभी सदस्यों ने नगर आयुक्त के खिलाफ और बाकी अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया है। अधिकारियों की हठधर्मिता देख रहे हैं। अधिकारी सरकार के विरुद्ध काम कर रहे हैं। सरकार को इसकी सूचना होनी चाहिए। मैं इसकी शिकायत शासन और सरकार दोनों से करुंगी। फिलहाल मैंने मंडलायुक्त, प्रमुख सचिव नगर विकास, डीएम को बता दिया है।
बैठक के पार्षद प्रकाश केसवानी द्वारा नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया गया, जिस पर 72 पार्षदों ने हस्ताक्षर करके महापौर को सौंपा। महापौर ने कहा कि प्रस्ताव को मुख्यमंत्री को भेजूंगी। महापौर ने कहा कि सदन की गरिमा सर्वोपरि है। अधिकारी का सदन से नदारद रहना जनप्रतिनिधियों की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि मुझे जनता के कार्यों को कराने के लिए चुना है, अधिकारी मेरा साथ दें या न दें, मैं जनता के कार्यों को कराने के लिए लड़ती रहूंगी।