आगरालीक्स…आगरा से बंदरों का आतंक होगा खत्म. वन विभाग ने दी नसबंदी की अनुमति. नगर निगम पहले चरण में करेगा इतने बंदरों की नसबंदी
आगरा में बंदरों की बड़ी समस्याएं हैं. हाल ही में कई घटनाएं ऐसी सामने आई हैं जिनमें बंदरों के काटे खाने जैसे मामले हैं. ताजमहल पर पर्यटकों के साथ लगातार बंदरों द्वारा हमला किए जाने और पर्यटकों के घायल होने की खबरों ने भी बंदरों के आतंक से हर किसी को चिंतित किया है. इसको लेकर नगर निगम द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे थे और वन विभाग को भी सूचित किया गया था.
अब वन विभाग की ओर से बंदरों की नसंबदी की अनुमति नगर निगम को दे दी गई है. आगरा में करीब दस हजार बंदरों की नसबंदी की जानी है लेकिन अभी फिलहाल पहले चरण में 500 बंदरों की नसबंदी की जाएगी. नगर निगम ने बंदरों की नसबंदी की योजना बनाई है.

हाईकोर्ट ने भी लिया है बंदरों की समस्या पर संज्ञान
आगरा में बंदरों की समस्याओं को लेकर एक याचिका आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन एवं समाजसेवी प्रशान्त जैन द्वारा प्रस्तुत की गयी थी. न्यायालय ने राज्य सरकार एवं नगर निगम आगरा सहित बनाये गये 9 विपक्षीगण को नोटिस भी जारी किया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रतींकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि बंदरों के खतरे ने आगरा शहर को त्रस्त कर दिया है जहां पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बंदर समान रूप से परेशान करते पाए जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप निवासियों को गंभीर चोटें और कीमती सामान का नुकसान हो रहा है. कभी-कभी बंदरों के हमले के कारण युवा और वृद्धों की मौत हो गई. जनहित याचिका के माध्यम से न्यायालय के हस्तक्षेप से बन्दरों को दूर करना चाहते हैं क्योंकि विशेष रूप से इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अधिकारीगण इस समस्या के समाधान में विफल रहे हैं.
बन्दर है संरक्षित वन जीव
अधिवक्ता जैन ने यह भी बताया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के परिशिष्ट-2 की प्रविष्टि 17ए के अनुसार बन्दर वन्य जीव है और संरक्षित है. अतः वन विभाग एवं नगर निगम इस समस्या का समाधान खोजने के लिए जिम्मेदार हैं. राज्य सभा में भी आगरा, मथुरा, लखनऊ, वृन्दावन आदि शहरों की बन्दरों की समस्या को लेकर 7 अप्रैल 2022 को प्रश्न उठा था जिसमें समस्या को स्वीकार करते हुए यह भी बताया गया था कि केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा मथुरा एवं हलद्वानी में मंकी रेस्क्यू सेन्टर बनाने की अनुमति प्रदान की जा चुकी है.