आगरालीक्स… आगरा में ब्रज क्षेत्र का प्रमुख गोपाष्टमी पर्व एक नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन गोमाता और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता। जानिये क्या है महत्व।

गायों को स्नान कर सींगों को रंगा जाता है

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भण्डार भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि ब्रज क्षेत्र में गोपाष्टमी का बहुत महत्व है। इस दिन प्रात: गायों को स्नान कराया जाता है। गायों को सींगों को गेरू से रंगा जाता है। इस दिन बछडे़ सहित गाय की पूजा करने का विधान है। प्रात:काल में ही धूप-दीप, गंध, पुष्प, अक्षत, रोली, गुड़, जलेबी, वस्त्र तथा जल से गाय का पूजन किया जाता है। और आरती उतारी जाती है. इस दिन कई व्यक्ति ग्वालों को भी उपहार आदि देकर उनका भी पूजन करते हैं।
गोशालाओं में भी होते हैं आयोजन
🏵 गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर गोशाला में गोसंवर्धन हेतु गो पूजन का आयोजन किया जाता है. गो माता पूजन कार्यक्रम में सभी लोग परिवार सहित उपस्थित होकर पूजा अर्चना करते हैं।
शास्त्रों में भी गोपूजा का विशेष विधान
🌸 शास्त्रों में गोपाष्टमी पर्व पर गायों की विशेष पूजा करने का विधान निर्मित किया गया है। इसलिए कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष कि अष्टमी तिथि को प्रात गायों को स्नान कराकर उन्हें सुसज्जित करके गन्ध पुष्पादि से उनका पूजन करना चाहिए।
🔥 गोपाष्टमी की पौराणिक कथा
♦एक पौराणिक कथा अनुसार बालक कृष्ण ने माँ यशोदा से गायों की सेवा करनी की इच्छा व्यक्त की कृष्ण कहते हैं कि माँ मुझे गाय चराने की अनुमति मिलनी चाहिए उनके कहने पर शांडिल्य ऋषि द्वारा अच्छा समय देखकर उन्हें भी गाय चराने ले जाने दिया जो समय निकाला गया वह गोपाष्टमी का शुभ दिन था बलक कृष्ण ने गायों की पूजा करते हैं, प्रदक्षिणा करते हुए साष्टांग प्रणाम करते हैं।
🌺 गोपाष्टमी पर श्री कृष्ण पूजन
गोपाष्टमी पर गऊओं की पूजा भगवान श्री कृष्ण को बेहद प्रिय है तथा इनमें सभी देवताओं का वास माना जाता है. कईं स्थानों पर गोपाष्टमी के अवसर पर गायों की उपस्थिति में प्रभात फेरी सत्संग संपन्न होते हैं।
🔸 गोपाष्टमी तिथि प्रारंभ – रात्रि 01:11से (31 अक्टूबर 2022को)
🔸 गोपाष्टमी तिथि अंत – रात्रि 11:04तक (01 नवंबर 2022)