आगरालीक्स…130 करोड़ की मार्केट के बाद बेरोजगारी हमारी कमजोरी. आगरा में फेयर ट्रेड फोरम इंडिया का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का हुआ समापन, देश के विभिन्न प्रांतों की 47 संगठनों के पदाधिकारियों ने लिया भाग
130 करोड़ के बड़े मार्केट के बाद भी हमारे देश में बेरोजगारी हमारी कमजोरी को दर्शाता है। क्योंकि हम काम को छोटा-बड़ा समझते हैं। पढ़ लिख कर सिर्फ मेज कुर्सी पर बैठकर काम करना चाहते हैं। जिस दिन हम मान लेंगे कि कोई काम छोटा नहीं, उस दिन देश में कोई बेरोजगार नहीं रहेगा। यह कहना था शहर के वरिष्ठ व्यवसायी पूरन डाबर का। वह होटल क्लार्क-शीराज में फेयर ट्रेड फोरम इंडिया के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि डस्ट्री जीविका है लेकिन जीवन पर्यावरण है। इसलिए पर्यावरण का ध्यान रखना हमारा कर्तव्य है। लेकिन डस्ट्री को बेवजह विलेन बना दिया जाता है। सरकार एक सड़क बनाती है और उसे तोड़ने वाले 10 सरकारी विभाग खड़े हो जाते हैं। एक-एक सड़क वर्ष में पांच-पांच बार टूटती है। हम वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहे हैं। हम सोचते थे कि भारत का वैक्सीनेशन 12-15 वर्ष लग जाएंगे, लेकिन 78 प्रतिशत एक वर्ष में सम्भव हुआ। व्यवसायी रजत अस्थाना ने व्यवसाय को बढ़ाने कि टिप्स दिए। मुख्य वक्ता प्रो. अरुणोदय वाजपेयी विभागाध्यक्ष राजनीतिक शास्त्र आगरा कॉलेज आगरा ने कहा कि हमारे विकासात्मक कार्यों से पर्यावरण में अत्यधिक क्षरण हुआ है। मानव की छेड़खानी से ही आज पर्यावरण प्रदूषण विकराल रूप ले लिया है जो अम्ल वर्षा, ग्रीन हाउस प्रभाव, बाढ़, भूकंप, ओजोन परत में छेद, महामारी तथा ग्लेशियर का पिघलना आदि रूपों में प्रकट हो रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वच्छता अनिवार्य है। हमें पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाली वस्तुओं का कम से कम उपयोग, उनका पुन: उपयोग तथा पुनर्चक्रण करना चाहिए।

फोरम के अध्यक्ष पंचाक्श्रम ने धन्यवाद ज्ञापन व उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने योजन समिति के सदस्यों को पुरस्कृत किया। संचालन अभिषेक गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से अध्यक्ष पंचाक्श्रम, उपाध्यक्ष राजेश कुमार, सचिव अनुराग मित्तल, कोषाध्यक्ष मून शर्मा, स्मृति केडिया, पॉल थॉमस, कमल किशोर, एससी मित्तल, जॉनी जोसफ, रणवीर सिसौदिया, निखिल दा, अमरीष अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
हस्तशिल्पी जानते ही नहीं कि उनके लिए भी चल रही हैं सरकारी योजनाएं
दिल्ली से आई नेशनल फैडरेशन ऑफ हॉंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट व क्रि
डिग्निटी संस्था से जुड़ी गुंजन जैन ने बताया कि वह देश भर के लगभग 5 बजार हस्तशिल्यों से जुड़ी हैं। कहा कि सरकारी योजनाएं हस्तशिल्पियों तक पहुंच ही नहीं पाती। इसके मुख्य कारणों में कारीगरों को पता ही नता होता कि उनके लिए कोई योजना चल रही है। दूसरा कारण जिन्हें पता है व योजनाओं का लाभ पाने की औपचारिकता पूरी नहीं कर पाते। कई बार यसराकी योजनाएं तो जारी हो जाती हैं, लेकिन उसके लिए फंड नहीं। वहीं अक्सर दूसरी लॉबी के लोग जैसे बुनकरों का लाभ मिल सेक्टर वाले उठा ले जाते हैं। हम कारीगरों को जागरूक और शिक्षित करने के साथ सासन व प्रशासन स्तर पर भी सराकारी योजनाओं को सही लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।