आगरालीक्स ….आगरा में अब डिफॉल्टर बिल्डरों पर शिकंजा कस रहा है। बिल्डर को दो साल की कैद और 30 लाख रुपये का अर्थदंड.
आगरा के भरतपुर हाउस निवासी हीरालाल ने कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया था, वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह और जयवीर सिंह के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत किए गए वाद में कहा गया था कि मेसर्स विज कंट्रक्शन के प्रोपराइटर बिल्डर योगश विज से जमीन खरीने के लिए संपर्क किया। उन्होंने सिकंदरा की अपनी साइट के बारे में बताया, आरोप है कि बिल्डर ने कहा कि जमीन खरीदकर सस्ती दर पर फ्लैट बनाकर बेचेंगे। हीरालाल को जमीन पसंद आ गई और 15 लाख रुपये एडवांस में दे दिए।

बैनामा नहीं किया, चेक हुआ बाउंस
हीरालाल का आरोप है कि बिल्डर ने 25 अक्टूबर 2011 तक बैनामा कराने की बात कही लेकिन बैनामा नहीं कराया। वहीं, दिसंबर 2012 में चेक दे दिया। चेक बैंंक में लगाया तो बाउंस हो गया। विधिक नोटिस भेजा गया लेकिन बिल्डर ने कोई जवाब नहीं दिया। रुपये भी वापस नहीं किए। कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर बिल्डर को दोषी पाया।
दो साल की कैद, 30 लाख का जुर्माना
आगरा के अतिरिक्त पीठासीन अधिकारी सुरेश चंद ने 15 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में मेसर्स विज कंट्रस्क्शन के प्रोपराइटर बिल्डर योगेश विज को दो साल की कैद और 30 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है, अर्थदंड की राशि प्रतिकर के रूप मे ंवादी को दिलाने के आदेश दिए हैं। यह विज कंस्ट्रक्शन का दूसरा मामला है। इससे पहले भरतपुर हाउस निवासी नीतू अमरनानी ने चेक बाउंस होने के आरोप लगाए थे और बिल्डर योगेश विज को र्दोषी मानते हुए दो वर्ष की सजा और 20 लाख रुपये का अर्थदंड से दंडित किया था।