आगरालीक्स.. आगरा में आज कल की लाइफ स्टाइल से महिलाओं में कई गंभीर बीमारियां देखने को मिलती हैं। इन्हीं में से एक बीमारी फाइब्रॉइड यानि रसौली होने की भी है। अक्सर महिलाएं इस बीमारी के लक्षण पहचान नहीं पातीं, जिससे रसौली के कारण महिलाओं में बांझपन के साथ-साथ कई और बीमारियां भी हो जाती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने इसके मैनेजमेंट पर जोर दिया है।
आगरा आॅब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (एओजीएस) की ओर से शनिवार शाम फतेहाबाद रोड स्थित होटल गेटवे में फाइब्रॉइड मैनेजमेंट पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें इसमें प्रो. रिचा सिंह ने बताया कि फाइब्रॉइड भी पीसीओडी, इनफर्टिलिटी प्रॉब्लम्स में से ही एक है। यह महिला के गर्भाशय को प्रभावित करती है। अगर ध्यान न दिया जाए तो यह गर्भाशय से बाहर भी फैल सकती है। फाइब्रॉइड महिला के गर्भाशय में होने वाली एक अप्राकृतिक ग्रोथ है जिसमें कुछ जरूरत से ज्यादा सेल्स और कोशिकाएं एक साथ जुड़कर गांठ का रूप ले लेती हैं। इसके होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे घर में पहले कभी किसी महिला को होना, मोटापा, मांस का सेवन, शराब, कैफीन, विटामिन डी की कमी, विटामिन ए का अत्यधिक मात्रा में होना आदि। महिलाएं अक्सर इसे पहचान नहीं पातीं, क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते। चेयरपर्सन डा. रजनी पचौरी और एओजीएस की अध्यक्ष डा. सुधा बंसल ने बताया कि कुछ महिलाएं फ्राइबॉइड में बांझपन का शिकार भी हो जाती हैं या कई बार इसमें एबॉर्शन की नौबत भी आ जाती है। विशेषज्ञों ने इसके मैनेजमेंट पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शरीर के निचले हिस्से जैसे पेट के आस-पास, गर्भाशय के आस-पास दर्द होना, माहवारी में अत्यधिक रक्त स्त्राव होना और बहुत दर्द होना जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
इसके बाद भ्रूण के विकास और व्यवस्थीकरण पर एक पैनल डिस्कशन हुआ। इसमें डा. निधि गुप्ता, डा. अल्का सारस्वत, डा. संतोष सिंघल, डा. मधु राजपाल, डा. शिखा सिंह, डा. मीनल जैन आदि ने बताया कि गर्भावस्था अपने आप में महत्वपूर्ण समय है। गर्भधारण के पश्चात गर्भवती महिला के शरीर में हलचल होनी शुरू हो जाती है, जिसके परिणाम शरीर में बाहरी रूप से दिखाई पड़ने लगते हैं। विकास की प्रारंभिक अवस्था के लक्षण शुरुआत में निरंतर बदलते रहते हैं। गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के हार्मोन्स में तेजी से बदलाव आता है। प्रत्येक महीने में ये बदलाव और भी अधिक तेज हो जाते हैं। एक महीने के गर्भ में बच्चे के विकास को देखा जा सकता है। डा. वंदना सिंघल ने बताया कि यही वह समय होता है जब एक महिला को अपने गर्भस्थ शिशु के लिए और परिवार वालों को गर्भवती महिला के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।