
बच्चों में जन्मजात विक्रतियां बढ रही हैं, इन बच्चों को समस्याएं होती हैं और परिजन भी परेशान रहते हैं। इससे कैसे बचा जा सकता है, इस पर गुरुवार को होटल अमर में आयोजित एओजीएस की बैठक में चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड और ब्लड की जांच करने पर 13 वी की प्रिगनेंसी में गर्भस्थ शिशु की अनुवांशिक बीमारियों का पता चल सकता है। इस तरह की बीमारी होने पर इसे कंफर्म करने के लिए कई और जांचें कराई जाती हैं। जब यह स्पष्ट हो जाए कि गर्भस्थ शिशु को अनुवांशिक बीमारी है, उसका दिमाग ठीक से विकसित नहीं हुआ है, कोई अंग खराब है तो परिजनों से डिस्कशन करने के बाद गर्भपात करा देना चाहिए। इससे बच्चों में जन्मजात विक्रति को कम किया जा सकता है। वहीं, इस तरह के केस में गर्भपात न कराने पर मां और शिशु दोनों की जान को खतरा रहता है।
मधुमेह के लिए किया जागरूक
विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम बीट डायबिटीज पर भी चर्चा की गई। प्रिगनेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज और उसके इलाज पर चर्चा की गई। बैठक के अंत में गर्भ निरोधक डिम्पा पर भी चर्चा हुई। इस दौरान एओजीएस की अध्यक्ष डॉ संतोष सिंघल, डॉ वरुण सरकार, डॉ संध्या अग्रवाल, डॉ आरती गुप्ता, डॉ मधु राजपाल आदि मौजूद रहे।
डॉक्टरों ने चलाई साइकिल
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर आगरा डॉक्टर्स साइकिल एसोसिएशन ने साइकिल रैली निकालकर लोगों को जागरूक किया। आगरा मेडिसिटी, सिकंदरा से शहीद स्मारक तक डॉक्टरों ने साइकिल चलाई, दिल्ली गेट पर नुक्कड नाटक कर लोगों को मधुमेह से बचने और इलाज के बारे में जानकारी दी।
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