आगरालीक्स ..आगरा में तनाव मुक्त खिलखिलाती जिंदगी के टिप्स दिए गए। इसके लिए अप्सा द्वारा प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में मंगलवार को कार्यशाला आयोजित की गई।
अतिथि वक्ता श्रेया चुघ (बैंगलोर आश्रम) ने कहा कि आज के तकनीकी युग में दैनिक जीवन में मनुष्य इतना अधिक व्यस्त तथा तनावग्रस्त हो गया है कि वह प्रसन्नता अनुभव करने से बहुत दूर हो गया है और क्रोध, तनाव, भय, निराशा से घिरता जा रहा है। जीवन पर तनाव से होने वाले प्रभाव से व्यक्ति अपरिचित रहता है। इसका दुष्प्रभाव हमारी कार्य कुशलता तथा आस-पास के लोगों पर पड़ता हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में जो हम पाना चाहते हैं, वह मिल जाता है, तो वह सफलता है और इस सफलता को निरंतर चाहना ही प्रसन्नता है। उन्होंने विभिन्न क्रियात्मक एवं शक्तिशाली कौशल और तकनीक-योग, प्राणायाम, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, ध्यान पर विशेष बल देते हुए कहा कि इनके निरंतर अभ्यास से भय, निराशा, क्रोध तनाव, नकारात्मक, दृष्टिकोण आदि को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का विकास आसानी से किया जा सकता है।

प्राणायाम के द्वारा ऊर्जा को सही दिशा की ओर प्रेरित किया जा सकता है। उन्होंने प्राणायाम की अनेक विधियों को क्रियात्मक रूप में सभी लोगों को सिखाकर नई ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। प्राकृतिक श्वास लेने की तकनीक, मन और नकारात्मक भावनाओं को संभालने का साधन है। उन्होंने बताया कि प्रसन्न रहने के लिए शुक्रराना, मुस्कराना और किसी का दिल न दुखाना ये तीन रास्ते अपनाने चाहिए।
श्री चितवन नंदा ने बताया कि जीवन का आनंद लेना ही आर्ट ऑफ लिविंग है। हम सभी को आनंद की लहरों का स्वागत दिल से करना चाहिए।
प्रसन्नता वह पुरस्कार है, जो हमें हमारी समझ के अनुरूप सबसे सही जीवन जीने पर मिलता है। जब आप किसी काम की शुरूआत करें, तो असफलता से न डरें और उस काम को न छोड़े। उन्होंने प्रसन्न रहने के लिए जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्रेरित किया। जो चीजें आपके पास हैं, उन्हीं से खुश रहना सीखकर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
युवाओं में आत्म परिचय एवं अपनी शक्तियों को पहचानने की क्षमता विकसित करने के लिए उन्होंने बताया कि प्रसन्नता व्यक्ति के अंतस से व्यक्त होती है। प्रसन्नता तभी मिलती है, जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते है, सामंजस्य में हो। अपने जीवन में प्रसन्नता लाने के लिए योजनाएँ बनाकर उसे सकारात्मकता के साथ क्रियान्वित करके क्रोध, भय, तनाव, हताशा, आदि से शीघ्र ही छुटकारा पाया जा सकता है। गौतम बुद्ध के शब्दों में हैप्पीनेस का कोई मार्ग नहीं है, हैप्पीनेस ही मार्ग है। इस हैप्पीनेस मार्ग को अपनाकर कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों ने प्रसन्नता पूर्वक जीवन जीने के लिए प्रेरणा प्राप्त की और तनाव दूर करने के उपाय,आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी करने,एकाग्रचित्त मन ,भावनाओं पर नियंत्रण, रिश्तों में सुधार लाने, अच्छा स्वास्थ्य पाने, जीवन जीने की कला के साथ खुश रहने की कला सीखकर लाभान्वित हुए। कार्यशाला में उपस्थित लोगों की शंकाओं तथा जिज्ञासाओं का समाधान वक्ता अतिथि के द्वारा प्रश्नोत्तर तथा चर्चा करके भली-भाँति किया गया। गुरूपूर्णिमा पर्व पर उपस्थित सभी शिक्षकों ने अपने अतीत, वर्तमान तथा भविष्य के गुरूओं को याद करते हुए उन्हें सादर नमन किया।
सुचेता खन्ना तथा रष्मि मिश्रा आर्ट ऑफ लिविंग के सदस्यों, विद्यालयों के प्रबंधक, निदेशक, प्रधानाचार्य एवं कोर्डिनेटर्स का हार्दिक अभिनंदन किया तथा गुरूपूर्णिमा के पावन पर्व पर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी। कार्यशाला में अप्सा के लगभग 60 पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यगणों, प्रिल्यूड पब्लिक विद्यालय के निदेशकगण- डॉ. सुशील गुप्ता, श्याम बंसल, प्रधानाचार्या याचना चावला आदि मौजूद रहे।
अप्सा अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित कर आए हुए अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। स्वल्पाहार के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।