आगरालीक्स.. बढ़ते प्रदूषण के लिए मानव निर्मित कृत्रिम प्रकाश भी बड़ा कारण है। नेचर ईकोलॉजी एंड इवोलुयशन पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि मानव निर्मित प्रकाश से धऱती के जीवों का हार्मोन स्तर , प्रजनन चक्र और गतिविधियों का ढांचा तो प्रभावित हो रही है। इससे शिकारी जीवों के लिए भी बाधा पैदा हो रही है।
शोध में कहा गया है कि मानव निर्मित प्रकाश प्राकृतिक विश्व के लिए श्रृंखलाबद्ध तरीके से समस्या पैदा कर रहा है। एक्सेटर यूनीवर्सिटी की शोध टीम ने कहा है कि मानव निर्मित प्रकाश पृथ्वी पर हर वर्ष दो फीसदी की दर से बढ़ रहा है। यह एक बड़ी समस्या बन गया है।
पशु-पक्षियों की नींद का चक्र बदला
इस शोध अध्ययन के अनुसार मानव निर्मित कृत्रिम प्रकाश से वसंत ऋतु की शुरुआत में कीटों के कारण होने वाले परागण में कमी आती है। लाइट हाउस की वजह से समुद्री पक्षी दिशा भटक जाते हैं। समुद्री कछुए सुबह का सूरज समझ गलती से रोशनी में चमकते होटलों की ओर चले जाते हैं। सभी जानवरों की प्रजातियों मे वैज्ञानिकों ने मेलाटोनिना के स्तर को वैज्ञानिकों ने कम पाया, यह एक हार्मोन है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करता है। यह कृत्रिम प्रकाश से गड़बड़ हो रहा है।
कुछ जीवों का फायदा भी
शोध के मुताबिक कृत्रिम रोशनी से सामान्य और रात्रिचर दोनों ही जानवरों के व्यवहार में बदलाव दिखाई दिया है। रात में शिकार करने वाले बड़े चूहे कृत्रिम रोशनी की वजह से कम ही समय के लिए शिकार कर पाते हैं। पक्षियों ने सुबह होने से पहले ही चहकना शुरू कर दिया है और दिन से पहले ही कीड़ों की खोज में निकल जाते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ प्रजातियों ने इस कृत्रिम रोशनी से रात में लाभ भी उठाया है। कुछ चमगादड़ों की प्रजातियां तेजी से बढीं तथा कुछ पौधों में तेजी से वद्धि देखी गई।
एलईडी बल्वों से बढ़ी समस्या
इस शोध के प्रमुख लेखक प्रोफेसर केविन गैस्टन कहते हैं हमें कृत्रिम प्रकाश के बारे में सोचना चाहिए। उका कहना है कि पिछले पांच से दस सालों में दुनिया में कृत्रिम प्रकाश बढ़ा है। उपग्रहों से रात में ली गई तस्वीरों से साफ हो गया है कि भौगोलिक रूप से यह समस्या कितनी तेजी से बढ़ रही है। महंगे कम रोशनी वाले बल्वों को सस्ते और ज्यादा चमकीली रोशनी देने वाले एलईडी बदला जा रहा है। इसकी सफेद रोशनी में सूरज की तरह व्यापक स्पैक्ट्रम होता है।