आगरालीक्स… आगरा में बच्चों के बेड और गुड टच सहित यौन शोषण पर चर्चा की गई। हम बाल यौन उत्पीडन को रोक सकते हैं? हां हम ऐसा कर सकते हैं और हमें करना भी चाहिए की थीम पर रविवार को रेनबो हाॅस्पिटल में स्मृति संस्था के तत्वावधान में राउंड टेबल इंडिया के सहयोग से बाल यौन उत्पीडन पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। सुबह 10 से दोपहर 02 बजे तक चली कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों से शिक्षक-शिक्षिकाओं, बच्चों के अभिभावकों और आम नागरिकों को आमंत्रित किया गया था। इसमें शिक्षा, चिकित्सा, बाल मनोविज्ञान और साइबर सुरक्षा से जुडे विशेषज्ञों ने उपस्थितजनों को जागरूक करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बाल यौन शोषण उतने बडे पैमाने पर नहीं है जितना कहा जाता है। लेकिन आंकडे कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। साल 2007 में महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक जिन बच्चों का सर्वेक्षण किया गया उनमें से 53 प्रतिशत ने कहा कि वह किसी न किसी किस्म के यौन शोषण का शिकार हुए हैं। इस अध्ययन के मुताबिक आम धारणा है कि केवल लडकियों का ही यौन शोषण होता है जबकि सच तो यह है कि लडके भी इस खतरे में रहते हैं। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि बच्चों का शोषण करने वालों में बडी संख्या में भरोसे के और देखरेख करने वाले लोग भी होते हैं जिनमें अभिभावकों से लेकर रिश्तेदार, पडौसी और स्कूल शिक्षक तक शामिल हैं।
…..तकि गंदे इरादों को समझ सकें मासूम
बाल मनौवैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शिक्षकों और कानूनी सलाहकारों के पैनल ने लोगों को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। डा. नरेंद्र मल्होत्रा और डा. निहारिका ने बताया कि बच्चे बहुत ही मासूम होते हैं। साथ ही बच्चे गंदे इरादों को समझ नहीं पाते, उन्हें पता ही नहीं होता कि गुड टच और बैड टच क्या है। माता-पिता अपने बच्चे को गुड टच और बैड टच के बारे में जानकारी दें ताकि बच्चे गंदे इरादों को समझ सकें और अपने आपको सुरक्षित कर पाएं। साइकोलाॅजिस्ट डा. मल्लिका बत्रा बंसल ने बताया कि ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों से इस विषय पर बात करने से कतराते हैं, लेकिन मां और पिता को अपने बच्चों के साथ खुलकर बात करनी चाहिए। बच्चे से बात करके उनकी पूरे दिन की जानकारी लेनी चाहिए। बच्चों से हमेशा प्यार से बात करनी चाहिए ताकि वह डर की वजह से कुछ छिपाए नहीं। संस्था राउंड टेबल इंडिया के रोहित डंग और रेनबो हॉस्पिटल के डॉ ऋषभ बोरा ने बताया कि बाल यौन शोषण समाज में व्याप्त एक ऐसी बुराई है जो गन्दी मानसिकता की उपज है। दुखद है कि इस बारे में लोग बात करने से कतराते हैं जबकि इस पर खुलकर बात होनी चाहिए और इसके खिलाफ लड़ाई में सभी को भागीदार बनना चाहिए। सेंट पॉल्स स्कूल के प्रधानाचार्य फादर जिप्सन और ईडीथ्रीडी ऑर्गनाइजेशन कीं संस्थापक राखी चावला ने बच्चों के माता-पिता और शिक्षकों से सतर्क रहने और बच्चों पर नजर रखने की सलाह दी। वरिष्ठ महिला अधिवक्ता नम्रता मिश्रा ने बच्चों के साथ ऐसा कोई अपराध हो जाने की स्थिति में क्या कदम उठाए जा सकते हैं, इस बारे में जानकारी दी। आईटी एक्सपर्ट रक्षित टण्डन ने बच्चे जब कम्प्यूटर, लेपटॉप या मोबाइल पर काम करते हैं तब माता-पिता को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और कैसे वे अपने बच्चे की हरकत पर नजर रख सकते हैं इस बारे में जानकारी दी। इस दौरान रेनबो हॉस्पिटल के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉ राजीव लोचन शर्मा, डॉ विश्वदीपक, डॉ दीक्षा, एकता जैन, नूपुर मगन, डॉ अनुज आदि मौजूद थे।
मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की राय
यौन दुर्व्यवहार का शिकार होने वाले डरावने सपनों, मतिभ्रम, फलैशबैक और लगातार डर की संभावनाओं से ग्रस्त हो जाते हैं। दिन हो या रात, घर हो या बाहर, आॅफिस हो या कोई धार्मिक स्थल, सुनने में बुरा लग सकता है लेकिन सच यही है कि बच्चे और महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।
1- एक उम्र बाद इंसान अपने साथ हो रही गलत हरकत को समझ पाता है, लेकिन बच्चे जिन्हें कुछ भी समझ नहीं है, उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है, क्या हो रहा है, वे इसे न तो समझ पाते हैं और न ही किसी से कह पाते हैं। बस भीतरी तौर पर अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं।
2- यहां माता-पिता की भी गलती होती है, वे अपने बच्चे की परेशानी की वजह समझने की जगह उसे परेशान करने लगते हैं। यही उनकी सबसे बडी भूल बन जाती है जो उनकी संतान को मानसिक रूप् से उनसे दूर कर देती है।
3- लेकिन क्या महिलाएं ही हैवानियत का शिकार हैं, नहीं क्योंकि पहले हम सिर्फ बाल मजदूरी जैसी घटनाओं के बारे में सुनते थे लेकिन अब बच्चों को अपनी दरिंदगी, अपनी गंदी मानसिकता का शिकार बनाने वाले भी हमारे बीच सांस ले रहे हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
1- आपका और आपके बच्चे के बीच संवाद किसी भी रूप में कम नहीं होना चाहिए। आपकी प्राथमिकता आपकी संतान है।
2- अगर आप हर बात पर अपने बच्चे को डांटेंगे, डराएंगे तो वो कभी आपके साथ खुल नहीं पाएगा। आपको अपने बच्चे के मन में यह विश्वास पैदा करना होगा कि आप उसकी हर बात समझते हैं और उसके दोस्त हैं।
3- अगर आपका बच्चा आपसे अपनी बात नहीं कह पाएगा तो दूसरा व्यक्ति बडी आसानी से उसे बहका सकता है। जिसके परिणामस्वरूप वह बाल शोषण का शिकार हो सकता है।
4- बच्चे को स्पर्श यानि टच की परिभाषा समझाएं। गुड टच और बैड टच में क्या अंतर होता है, यह हर बच्चे को पता होना चाहिए।
5- आपको अपने बच्चे के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। अगर आपका बच्चा कुछ हटकर हरकतें करता है, एकदम से शांत रहने लगा है, तो यह चिंताजनक हालात हैं।
6- बच्चों को उनके यौनांगों और निजी शारीरिक अंगों के विषय से संबंधित जानकारी अवश्य दें, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पडे।
7- आपको अपने बच्चे को उन स्थितियों से भी परिचित कराना चाहिए जो यौन अपराध का कारण बन सकती हैं। मसलन अंधेरे में जाने से बचना चाहिए, एकांत में किसी के साथ नहीं जाना चाहिए, किसी भी व्यक्ति से चाॅकलेट या गिफट नहीं लेना चाहिए और माता-पिता या भाई-बहन के अलावा अकेले किसी के भी साथ कहीं बाहर नहीं जाना चाहिए।
8-सबसे बडी बात जो आपको अपने बच्चे को समझानी चाहिए कि खतरा केवल बाहर के लोगों से नहीं है, घर के भीतर भी आप खतरे के दायरे में ही रहते हैं। इसलिए बच्चों को किसी पर भी विश्वास करने से पहले सोचना चाहिए और हर समय सतर्क रहना चाहिए।