आगरालीक्स.. बिहार चुनाव कांग्रेस व लोजपा के घोषणा पत्र जारी, बिहार विधानसभा चुनावों के लिए सभी दलों औऱ गठबंधनों ने चुनाव प्रचार में पूरी शक्ति झोंक दी है। कांग्रेस और लोजपा ने अपने संकल्प पत्र जारी कर दिए हैं। राजद अपना संकल्प पत्र पहले ही जारी कर चुकी है। इस बीच विभिन्न पार्टियों के स्टार प्रचारकों की ताबड़तोड़ जनसभाएं शुरू हो चुकी हैं।
कांग्रेस ने बिहार में किसानों से वादा किया है कि अगर सत्ता में आए किसानों को मुफ्त बिजली और कर्ज माफ किए जाएंगे। पटना में आज जारी पार्टी के घोषणा पत्र को बदलाव पत्र नाम दिया गया है। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आई तो किसानों को फसल का सही मूल्य दिलाने का काम करेगी. उन्होंने कहा कि पंजाब की तर्ज पर बिहार में भी कृषि कानूनों को खारिज कर दिया जाएगा।
कांग्रेस नेता राजबब्बर ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आई तो नौकरी मिलने तक बेरोजगारों को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि केबिनेट की पहली बैठक में दस लाख नौकरियां देने का फैसला किया जाएगा।
लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने भी आज अपनी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र जारी किया। लोजपा इसे विजन डॉक्यूमेंट नाम दिया है। इस विजन डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो राज्य में प्रवासी मजदूर मंत्रालय बनाया जाएगा। ताकि दूसरे राज्यों में रहने वाले मजदूरों से संपर्क रखा जा सके। विजन डाक्यूमेंट में युवाओँ और महिलाओं को लुभाने वाली कई घोषणाएं की गई हैं।
ताबड़तोड़ रैलियां
बिहार में चुनावी रैलियों की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कांग्रेस की ओर से फिल्म स्टर राजबब्बर अन्य नेताओँ के साथ जगह-जगह रैलियां कर रहे हैं। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा भी जल्द बिहार में रैलियां करेंगे।
ओपिनयन पोल
चुनाव से पूर्व सामने आए लोकनीति सीएसडीएस के ओपिनयन पोल में नीतीश कुमार की वापसी के संकेत मिल रहे हैं लेकिन मतदाताओं की बड़ी संख्या ऐसी है, जिन्होंने अभी तक तय नहीं किया है कि उनका वोट किसे जाता है। ये फ्लोटिंग मतदाता सारे सर्वे नतीजों को फेल कर सकते हैं। सर्वे में बेशक नीतीश जीतते हुए दिख रहे हैं लेकिन राजद नेता तेजस्वी यादव की जनसभाओं में जिस तरह भीड़ उमड़ रही है, उससे सर्वे के नतीजे गलत सिद्ध हो सकते हैं। बिहार के 60 फीसदी मतदाता राज्य में सियासी बदलाव की चाहत रखते हैं।