आगरालीक्स…बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत पर प्राचार्य डॉ आरके मिश्रा ने नैतिकता के आधार पर त्याग पत्र दिया तो सरकार ने प्राचार्य को निलंबित कर दिया। आॅक्सीजन में कमीशन के खेल के आरोप लग रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि आॅक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई है लेकिन चार दिनों में 28 मौत हो चुकी हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में म्रतकों की संख्या बढ रही है, इस बीच शनिवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर भेजे मंत्रियों सिद्धार्थनाथ सिंह और आशुतोष टंडन से रिपोर्ट ली और प्रेस कांफ्रेस में कहा कि चार दिन में 28 अस्पताल में हुईं है लेकिन कोई मौत आक्सीजन की कमी से नहीं हुई। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है जो आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी की भूमिका की जांच करेगी। उनसे यह पूछे जाने पर कि आक्सीजन से मौतें नहीं हुईं तो निलंबन क्यों, इस पर मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि आक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनी का भुगतान रोकने की वजह से उन्हें निलंबित किया गया।
कमीशन का खेल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार
बच्चों की मौत के बाद अब मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी बता रहे हैं कि मैडम (मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राजीव मिश्र की पत्नी) सामान्य रवायत से दो फीसद ज्यादा कमीशन चाहती थीं, इसीलिए उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान लटका रखा था। चिकित्सा शिक्षा विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि कंपनी अपना बकाया मांग रही थी जबकि मैडम ज्यादा कमीशन का तगादा कर रही थीं। कर्मचारियों के मुताबिक प्रदेश के मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर 10 फीसद का कमीशन तय है। आपूर्ति करने वाली कंपनियां और आपूर्ति मंजूर करने वाले अधिकारियों के बीच बिना मांगे ईमानदारी से यह लेनदेन चलता रहता है।
आगरा के एसएन में 30 लाख बकाया
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में आॅक्सीजन का 30 लाख रुपये बकाया है, इसके लिए कई बार शासन को पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन बजट नहीं मिला है।