आगरालीक्स…. बसपा से पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को निलंबित किया है, निष्कासित नहीं किया। वे अन्य दल में जाते हैं तो विधायक नहीं रहेंगे, जाने राजनीति शास्त्र के विशेषज्ञ डॉ अरुणोदय वाजपेयी से दल बदल के बाद संविधान के अनुमोदन 10 में किए गए प्रावधान।
मंगलवार को बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सादाबाद के विधायक रामवीर उपाध्याय को पार्टी से निलंबित कर दिया है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम ने पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय पर लोकसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के साथ विरोधी पार्टी के प्रत्याशियों का समर्थन करने और गठबंधन के प्रत्याशियों के लिए प्रचार न करने के आरोप लगाए है। यह भी कहा है कि सचेत करने के बाद भी पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को तत्काल पार्टी से निलंबित किया जाता है, विधानसभा के मुख्य सचेतक के पद से भी हटाया जाता है। वे पार्टी के कार्यक्रम और मीटिंग में भाग नहीं लेंगे और मीटिंग के लिए आमंत्रित भी नहीं किया जाएगा।
दूसरी पार्टी ज्वाइन करने पर मेंबरशिप हो जाएगी खत्म

रामवीर उपाध्याय बसपा से विधानसभा चुनाव जीते थे। आगरा कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अरुणोदय वाजपेयी का कहना है कि सत्ता के लिए विधायकों की खरीद पफरोख्त और दल बदल के मामले सुर्खियों में आने के बाद संविधान के अनुमोदन 10 में दल बदल के लिए प्रावधान किया गया है। इसके जिस पार्टी से विधायक और सांसद चुनाव जीतेगा, वह दूसरी पार्टी ज्वाइन करता है तो उसकी मेंबरशिप समाप्त हो जाएगी, यानी वह विधायक नहीं रहेगा। इसी तरह से सदन में विश्वास मत के लिए पार्टी के आदेश के बाद भी विधायक और सांसद दूसरे दल को वोट देता है तो पार्टी के कहने पर उसकी मेंबरशिप निरस्त हो जाएगी। चूंकि बसपा ने रामवीर उपाध्याय को पार्टी से निलंबित किया है, पार्टी से निष्कासित नहीं किया है। इसका अशय यह है कि वह बसपा के सदस्य हैं, वे दूसरे दल को ज्वाइन करते हैं तो मेंबरशिप समाप्त हो जाएगी।
