आगरालीक्स… आगरा और फीरोजाबाद के बडे कारोबारियों का बीसी में करोडों रुपये लगाने वाले संजीव गुप्ता, उनकी पत्नी सारिका गुप्ता सहित चार लोगों को हिरासत में लिया है, अपहरण की झूठी कहानी बनाने और धोखाधडी के मामले में पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
राजा का ताल स्थित आर्चिड ग्रीन निवासी संजीव गुप्ता 22 जुलाई की शाम को अपने अपहरण की कहानी रचकर गायब हो गया था। उसकी पत्नी सारिका गुप्ता, साला सागर गुप्ता निवासी आर्चिड ग्रीन, भतीजा विकल्प गुप्ता निवासी झरिया जिला धनबाद झारखंड को जेल भेजा है। संजीव ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म स्वीकार कर बताया कि बीसी में उसकी करोड़ों की देनदारी हो गई थी। इससे वह दबाव में था। एडिफाई स्कूल, सागर रत्ना रेस्टोरेंज और दो कांच फैक्ट्रियों में रुपया लगाने से घाटा हो गया था। हाईफाई जीवन जीने से उसकी जमा पूंजी खत्म हो गई थी। लोगों का रुपया नहीं चुकाना पड़े, इसके लिए यह नाटक रचा था। एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने बताया कि संजीव का प्लान था कि अगर अपहरण की कहानी लोगों के आगे झूठी साबित हो जाए तो वह अपने परिवार के साथ विदेश भाग जाता। इसलिए दबोचने से पहले उसका पासपोर्ट घर से जब्त कर लिया था। चारों आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पुलिस ने जुटाए हैं। उनको धारा 419, 420, 467, 468, 469, 471, 500, 507, 120 बी, 34, 182, 186, 187 आईपीसी में कोर्ट के सामने पेश कर जेल भेजा है।
28 जुलाई को पानीपत के होटल में मिला कारोबारी
आगरा और फीरोजाबाद के बडे कारोबारियों का बीसी में करोडों रुपये लगाने वाली संजीव गुप्ता पानीपत के एक होटल में मिला, वह खुद एसटीएफ के पास पहुंचा। उसने खुद ही अपहरण का नाटक रचा था। पुलिस की सख्ती से मामला खुल गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार की शाम को अपने अपहरण की कहानी बनाकर गायब हुआ पफीरोजाबाद का बीसी व होटल संचालक संजीव गुप्ता लगातार छह दिनों तक पुलिस से आंख मिचौली खेलते रहा। इस दौरान उसने कई बार परिवार के पास मैसेज कर सबको अपहरण की कहानी में उलझाया और कई बार यह भी दर्शाया कि वह कितनी परेशानी में है। एसटीएफ और एसओजी की टीमों ने उसे नोयडा, दिल्ली, एनसीआर, चंडीगढ़ और श्रीनगर में खंगाला लेकिन मंगलवार की रात से जैसे ही उसकी लोकेशन मिलना बंद हुई पुलिस की परेशानी बढना शुरू हो गई थी। गुरुवार की देर सायं आए आईजी ने जैसे ही परिजनों से पूरे डेढ़ घंटे तक अलग अलग पूछताछ की, इससे अपहरण की कहानी खुल गई। गुरुवार दोपहर तीन बजे के बाद संजीव गुप्ता पर संदेश पहुंच गया और पानीपत के होटल से सीधे जाकर उसने एसटीएफ के सामने घुटने टेक दिए, तब जाकर पुलिस अधिकारियों, एसटीएफ की नोयडा, अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद के साथ साथ एसओजी की टीमों ने राहत की सांस ली।
100 करोड की मांगे
करोबारी को छोडने के लिए अपहरणकर्ताओं ने 100 करोड मांगे हैं, एसटीएफ सहित पुलिस फोर्स फिरोजाबाद के कारोबारी संजीव गुप्ता की तलाश में जुटी हुई है। उसके आगरा में भी डॉक्टर सहित बडे कारोबारियों से संपर्क थे। रविवार को 100 करोड रुपये मांगे जाने के बाद जांच तेज हो गई है।
12 जुलाई को हुआ गायब
फिरोजाबाद में बीसी का कारोबार चलाने वाले और सागर रत्ना, एडिफाई वर्ल्ड स्कूल समेत कई नामचीन संस्थाओं के पार्टनर संजीव गुप्ता (45) पुत्र शांति स्वरूप गुप्ता निवासी आर्चिड ग्रीन राजा ताल का बडा कारोबार है। वे शनिवार की शाम साढ़े पांच बजे सागर रत्ना होटल से घर के लिए निकले थे। थोड़ी देर बाद उनकी पत्नी सारिका गुप्ता ने उनके मोबाइल पर फोन मिलाया क्योंकि सागर रत्ना से उनके घर की दूरी मात्र दो किलोमीटर से भी कम है और चंद मिनटों में ही वे अपनी कार सेंटा फी से पहुंच जाते थे।
पत्नी के फोन मिलाने पर हुई जानकारी
शनिवार की शाम पत्नी के फोन मिलाने पर जब उनके सभी मोबाइल नम्बर स्विच आफ जाने लगा तो चिंता बढ़ गई। उन्होंने सागर रत्ना के कर्मचारियों से फिर पूछा कि संजीव गुप्ता कितने बजे निकले थे। करीब एक घंटे से ज्यादा समय में भी वे नहीं पहुंचे तो मामले से सारिका ने परिजनों और संजीव के दोस्तों को अवगत कराया। तत्काल मामला एसएसपी फिरोजाबाद अजय कुमार तक पहुंचा तो उन्होंने गंभीरता दिखाते हुए उद्योगपति के अपहरण की आशंका को लेकर पुलिस की टीमें लगा दी हैं।
वहीं परिजनों की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। संजीव के अचानक गायब होने से उद्योगपतियों से लेकर व्यापारियों और उनके जानने वालों में हड़कंप मच गया है। उनके आवास पर देर रात विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं, उद्योगपतियों का तांता लगा हुआ है।
आगरा से लेकर मथुरा में भी संपर्क
फिरोजाबाद के नई बस्ती मोहल्ले में रहकर चूड़ी का गोदाम चलाने वाले संजीव गुप्ता मोहल्ले में बीसी (मासिक लॉटरी) चलाते थे, काम बढा तो उन्होंने हाथरस, मथुरा के कारोबारियों को भी अपने साथ जोड लिया, संजीव के गायब हो जाने की खबर ने इन लोगों की भी नींद उड़ा दी है। तमाम लोगों के पैसे फंसे हैं। अब वे एकदूसरे को फोन करके हालात का जायजा लेने में जुटे हैं।