आगरालीक्स… गुर्दे में पथरी, समस्या आम है, आगरा के यूरोलाजिस्ट प्रोफेसर डॉ. एमएस अग्रवाल से जानें गुर्दे की पथरी क्यों बनती है, पेशाब के रास्ते और तीन से चार मिलीमीटर का चीरा लगाकर पथरी को कैसे निकाला जाता है। न दर्द न हास्पिटल में ज्यादा दिन भर्ती ही रहना पड़ता है। #prof.msagarwal# #laserLithotripsy# #kidneystone#
आगरा के यूरोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. एमएस अग्रवाल बताते हैं कि गुर्दे का काम खून के टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालना है। जब गुर्दे में टॉक्सिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, पानी कम पीने से ये पेशाब के रास्ते बाहर नहीं निकल पाते हैं तो गुर्दे में पथरी बनने लगती है। इसी तरह से शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाए तो इससे गुर्दे में कैल्शियम स्टोन बन सकते हैं। गुर्दे के स्टोन का आकार धीरे धीरे बढ़ने लगता है, जब दर्द होता है, कुछ केस में दर्द भी नहीं होता है। पथरी का आकार 6 एमएम से अधिक होने के बाद परेशानी होने लगती है। गुर्दे की पथरी को गंभीरता से लेना चाहिए और डॉक्टर के परामर्श से आपरेशन करा लेना चाहिए।

अब ओपन सर्जरी नहीं, चार एमएम के चीरे और पेशाब के रास्ते निकाली जा रही पथरी
गुर्दे की पथरी निकालने के लिए ओपन सर्जरी की जाती थी, पेट में चीरा लगता था दर्द होता था और मरीज सात दिन अस्पताल में रहता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब गुर्दे की पथरी को पेशाब के रास्ते से दूरबीन डालकर छोटे छोटे टुकड़ों में पीस कर परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोट्रिप्सी (पीसीएनएल) विधि से बाहर निकाल दिया जाता है। इसी तरह से गुर्दे के किसी हिस्से में पथरी है तो तीन से चार एमएम का चीरा लगया जाता है। रेट्रोग्रेड यूरेटरोरेनोस्कोपी (यूआरएस या आरआईआरएस) से गुर्दे की पथरी को निकाल दिया जाता है। लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है, दो से तीन दिन भर्ती, दर्द नहीं होता और सात दिन बाद काम पर जा सकते हैं।