
सेंट्रल एक्साइज, आगरा के कमिश्नर आरसी सांखला ने स्पष्ट किया कि 12 करोड से अधिक का टर्नओवर करने वाले आभूषण विक्रेताओं पर ही एक फीसद एक्साइज डयूटी लगेगी। इस दायरे में बहुत कम कारोबारी आएंगे, आगरा जैसे शहर में अधिकांश कारोबारियों का कारोबार बहुत कम है। साथ ही जॉब वर्क करने वाले कारोबारियों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
न कोई सर्वे और न वेरििफकेशन
अपर आयुक्त डॉ यशोवदर्धन पाठक ने बताया कि 12 करोड से ज्यादा का टर्नओवर होने पर न कोई सर्वे होगा और न ही सत्यापन किया जाएगा। निजी रिकॉर्ड और वैट के रिकॉर्ड को ही सही माना जाएगा।
नहीं लगाने होंगे विभाग के चक्कर
सराफा कारोबारियों का कहना है कि एक पफीसद एक्साइज डयूटी लगने पर विभाग के चक्कर लगाने होंगे, इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि टैक्स आॅनलाइन भरना होगा, किसी सीए और इंस्पेक्टर की भी जरूरत नहीं होगी। इसके चलते कारोबारियों को विभाग के चक्कर भी नहीं लगाने होंगे।
सभी आभूषणों पर नहीं है टैक्स
यह भी स्पष्ट किया गया कि हीरे, रूबी, रत्न, मणि जडित चांदी पर ही एक पफीसद एक्साइज डयूटी है, इसके अलावा किसी अन्य आभूषण पर यह नहीं है।
17 मार्च को दिल्ली में प्रदर्शन
एक तरफ सेंट्रल एक्साइज विभाग ने एक फीसद एक्साइज डयूटी को स्पष्ट कर दिया है। वहीं, दूसरी तरफ साराफा कारोबारी अपनी मांगों को लेकर 17 मार्च को दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे, आगरा से बस के द्वारा कारोबारी दिल्ली जाएंगे।
ये है मांग
श्री सराफा कमेटी ने वित्तमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि केंद्र सरकार आयात होने वाले सोने पर 10 फीसदी कस्टम ड्यूटी वसूल रही है। यह सोना रॉ मैटेरियल के रूप में प्रयोग होता है और इसका महज 50 फीसदी ही आभूषणों में उपयोग हो पाता है। अगर राजस्व ही बढ़ाना है तो कस्टम ड्यूटी 10 की जगह 11 प्रतिशत कर दें। इससे एक्साइज की अपेक्षा कहीं ज्यादा टैक्स मिल जाएगा।
सोने, हीरे के आभूषणों पर केंद्र सरकार दो बार एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रयास कर चुकी है, लेकिन दोनों ही बार व्यापारियों के कड़े विरोध के कारण कदम पीछे खींचने पड़े। साल 2005 में केंद्र सरकार ने दो प्रतिशत एक्साइज लगाया था, जबकि 2012 में एक फीसदी ड्यूटी लगाई गई। दोनों ही बार व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन बंदी कर सरकार को रोल बैक के लिए मजबूर कर दिया। यह तीसरा मौका है, लेकिन व्यापारी एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ लंबे आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। वित्त मंत्री सराफा कारोबारी की मांग को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं, ऐसे में वे पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के प्रयास में जुटे हुए हैं।
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