आगरालीक्स.. आगरा के कोरोना पॉजिटिव वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ आरसी मिश्रा ठीक होकर घर पहुंचे, उन्होंने कहा हैपी हाइपोक्सिया से मौत हो रही हैं, नहीं संभले तो अमेरिका इटली जैसा होगा हाल.
आगरा के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ आरसी मिश्रा के कोरोना संक्रमित होने पर नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, वे ठीक होकर 14 जून को अपने स्वदेशी बीमा नगर स्थित घर पर आ गए। अब वे अपने घर में होम क्वारंटीन हैं। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ आरसी मिश्रा का मीडिया से कहना है कि कोरोना एक ऐसी बीमारी है जो किसी को नहीं छोड रही है। हर जाति, धर्म और उम्र के लोग कोरोना की चपेट में आ रहे हैं, वही बच सकते हैं जो सावधानी बरतें। मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। ऐसा नहीं किया तो अमेरिका और इटली जैसे हालात हो जाएंगे।
कोरोना में इसलिए बढ रही मौतें
वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ आरसी मिश्रा ने बताया कि कोरोना वायरस फेफडों पर अटैक करता है, इससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। खून में आक्सीजन की कमी हो जाती है लेकिन लोगों को पता नहीं चलता है, यह धीरे धीरे एक साइलेंट किलर की तरह से काम करता है, इस स्थिति को हैपी हाइपोक्सिया कहते हैं। मरीज ठीक दिखाई देता है लेकिन उसके खून में आक्सीजन की कमी होने लगती है, एक दिन अचानक सांस लेने में परेशानी हो जाती है। मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता है लेकिन तब तक फेफडे डैमेज हो चुके होते हैं और मरीज की मौत हो जाती है।
कोरोना को मात देने के लिए सुधारें खान पान और आचार विचार
वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ आरसी मिश्रा का कहना है कि कोरोना का इलाज नहीं है, वैक्सीन के बारे में भी अनिश्चितता है, ऐसे में कोरोना को मात देने के लिए अपना खान पान सुधार लें, पौष्टिक आहार जिसमें खूब हरी सब्जी हों उसे लें। साथ ही ध्यान, योग के साथ आध्यात्म से अपने आचार विचार अच्छे रखे, भागवत गीता का पाठ करें, इससे मनोबल बढता है।
डॉक्टरों के लिए कठिन परीक्षा
इन हालातों में जब दुनिया भर की चिकित्सकीय सेवाएं पंगु हो चुकी हैं, ऐसे में डॉक्टरों के लिए चुनौती है कि वे किस तरह से कोरोना से बचते हुए मरीजों की जान बचाएं। क्योंकि सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा डॉक्टरों को है। यह वायरल तेजी से फैलता है।