आगरालीक्स… आगरा में जूता निर्माता इकाई के कुछ महीने के लिए बंद होने को लेकर असमंजस है, एपफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर का कहना है कि आर्डर कम होने की वजह से फैक्ट्रियां बंद तो नहीं होंगी लेकिन उनमें काम करने के समय में कटौती जरूर की जा सकती है।
आगरा में जूता उद्योग को लेकर ऊहापोह के हालात बने हुए हैं। जूता फैक्ट्रियों के बंद होने और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जूता उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है यह कठिन समय है और इस चुनौती का सामना कर लिया जाएगा। जूता उद्योग पूरी तरह से बंद नहीं होगा।
आगरा फुटवेयर मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्टस् चैंबर के अध्यक्ष पूरन डावर का कहना है कि जूता उद्यमियों के पास समर सीजन के 50 प्रतिशत आर्डर हैं। उद्यमियों द्वारा इसे पूरा किया जा रहा है। आर्डर कम होने की वजह से फैक्ट्रियां बंद तो नहीं होंगी लेकिन उनमें काम करने के समय में कटौती जरूर की जा सकती है। दो शिफ्ट की जगह एक शिफ्ट में काम किया जाएगा अथवा आधा दिन कार्य होगा और आर्डर को जनवरी-फरवरी तक पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से इसका असर पड़ा है।
आगरा फुटवेयर मैन्यूफैक्चर एंड एक्सपोर्टस् चैंबर के उपाध्यक्ष गोपाल गुप्ता का कहना है कि जूता उद्योग पूरी तरह से बंद नहीं होगा। कुछ जूता फैक्ट्रियों के लिए यह कठिन समय जरूर है लेकिन जूता उद्योग इस संकट से बाहर निकल आएगा। जूता उद्योग से जुड़े कारीगरों के हितों और उनके संरक्षण पर भी ध्यान देने की जरूरत है। फैक्ट्रियों को बंद करने का कोई औचित्य नहीं है। कुछ फैक्ट्री संचालकों की अपनी मजबूरी हो सकती है। जूता उद्योग को संकट से निकालने के लिए जूता कारीगरों को भी अपने कार्यों को निपुणता से निपटाना होगा। संकट का समय जल्द निकल जाएगा।
देश के जूता निर्यात में 28 फीसद आगरा की भागेदारी
आगरा में बडे स्तर पर जूता निर्यात होता है, देश से होने वाले जूते के निर्यात में आगरा की 28 फीसद भागेदारी है, आगरा से 80 पफीसद जूता निर्यात यूरोपियन देशों को होता है और 20 फीसद अमेरिकी देशों में जूता सप्लाई किया जाता है।