आगरालीक्स…(शरद यादव) आगरा में एत्मादपुर की टर्न लेती पिच पर भाजपा को मिल रही बसपा की गुगली से चुनौती. रोमांचक होने वाले फाइनल मैच में 7 दिन बाकी…
आगरा में विधानसभा का मैच जीतने के लिए सभी राजनीतिक दलों के सूरमा अपनी-अपनी पिच पर ताकत झोंके हुए हैं। फाइनल मैच में सिर्फ सात दिन बचे हैं। एत्मादपुर विधानसभा की पिच पर इस बार अभी तक भाजपा-बसपा में रोमांचक मुकाबले के आसार बन रहे हैं।
भाजपा को अनुभवी कप्तान से जीत का भरोसा
भाजपा ने एत्मादपुर की पिच (सीट) पर बसपा से भाजपा में आए डा. धर्मपाल सिंह जैसे अनुभवी को टिकट देकर कप्तान बनाया है।
पिच का बदला रुखः टी-20 फार्मेट की हुई
भाजपा को अपने चुनावी समीकरण से उम्मीद है कि धर्मपाल इस सीट पर पर आसानी से जीत हासिल कर लेंगे, लेकिन पिच अब टेस्ट मैच की न होकर टी-20 की हो गई है।
यह उतरे हैं मैदान में
एत्मादपुर से भाजपा के डा. धर्मपाल से मुकाबले के लिए बसपा के राकेश बघेल, कांग्रेस की शिवानी बघेल और सपा-रालोद गठबंधन के ड़ा. वीरेंद्र सिंह चौहान अपनी-अपनी टीम के कप्तान के रूप में मैदान में हैं।

बसपा ने पिच का मिजाज भांपा, सुप्रीमो का भी सहारा
अभी तक के हालात पर नजर डालें तो टर्न लेती इस राजनीतिक पिच पर बसपा के राकेश बघेल भाजपा के डा, धर्मपाल को सीधे टक्कर देते नजर आ रहे हैं। बसपा को इस सीट पर अपने परंपरागत वोटों का भरोसा है। बसपा की सुप्रीमो भी कल आगरा में अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए गर्जना कर गई हैं, जिससे बसपा को सीधा लाभ मिलेगा। राकेश बघेल का बघेल समाज में अपना प्रभाव है और वोटर भी काफी संख्या में झुक सकते हैं, जो उनके लिये फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
भाजपा के पिछले कप्तान खेमे में भी बेचैनी
भाजपा को वर्ष 2017 का मैच जिताने वाले रामप्रताप सिंह चौहान का इस बार पत्ता साफ कर दिये जाने से उनमें और ठाकुर समाज में भी बेचैनी है।
मुस्लिम वोट ऐन मौके पर भी बदलता है रुख
बसपा का अपना गणित है कि इस समाज का वोट भी उनके खाते में आएगा। साथ ही पलड़ा भारी होने पर मुस्लिम समाज का वोट भी उनके पक्ष में गिरेगा क्योंकि मुस्लिम समाज का वोट ऐन मौके पर जीतने वाले प्रत्याशी के पक्ष में जाता है। वह अपना वोट खराब नहीं करना चाहता है।
भाजपा की रणनीति की होगी खासी परीक्षा
बसपा वर्ष 1996, 2007 और वर्ष 2012 के चुनाव में जीत हासिल कर चुकी है। पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रही है। टर्न लेती एत्मादपुर की इस पर पिच पर इस चुनाव में भाजपा की बल्लेबाजी की गहराई की खासी परीक्षा होने वाली है।
सपा-रालोद के वीरेंद्र की तेज गेंदबाजी करेगी परेशान
सपा-रालोद गठबंधन के डा. वीरेंद्र सिंह चौहान तेज गेंदबाज के रूप में चुनौती दे रहे हैं, उनके पक्ष में सपा-रालोद के परंपरागत वोटों का भरोसा है। रालोद यहां खाता खोल चुकी है तो सपा दो बार दूसरे नंबर पर रह चुकी है। साथ ही ठाकुर मतदाताओँ का झुकाव भी खासा हो सकता है। मुस्लिम वोटों के साथ सवर्ण वर्ग का वोट उनकी जीत की राह बना सकता है लेकिन वोटों की उलट-पलट का असर भाजपा पर ज्यादा पड़ सकता है।
कांग्रेस को 42 साल से खाता खुलने का इंतजार
कांग्रेस ने इस सीट पर शिवानी बघेल को कप्तानी सौंपी कांग्रेस को अपने परंपरागत वोटों के अलावा मुस्लिम, दलित समाज के वोटों का भरोसा है। शिवानी सिंह बघेल समाज के भी कुछ वोट काट सकती हैं लेकिन कुल मिलाकर उनके लिए टर्न लेती इस पिच पर राह किसी तरह से आसान नहीं है। इस पिच पर कांग्रेस 1980 में आखिरी मैच जीती थी। इसके बाद से उसकी जीत का खाता नहीं खुला है।
पिछले पांच चुनावों में कौन कब जीता
वर्ष 2017 राम प्रताप सिंह भाजपा
वर्ष 2012 डा. धर्मपाल सिंह बसपा
वर्ष 2007 नारायण सिंह बसपा
वर्ष 2002 गंगा प्रसाद पुष्कर रालोद
वर्ष 1996 गंगा प्रसाद पुष्कर बसपा