
बुधवार रात को राजामंडी जीआरपी की चेकिंग टीम मुंबई से दिल्ली जा रही पंजाब मेल में चढ़ी तो एक वेंडर ने बताया कि कोच में मौजूद एक इंस्पेक्टर ने 50 रुपए रिश्वत लिए हैं । इससे चेकिंग दस्ते को शक हुआ । पुलिस टीम ने नरेशचंद्र से पूछताछ की तो उसने खुद को सीआइए अागरा का प्रभारी बताया। यही नहीं उसने पुलिस टीम को इस बात के लिए फटकार भी लगाई कि ट्रेनों में आपराधिक घटनाएं होने के बावजूद पुलिस सतर्कता नहीं बरत रही है । पुलिस वाले अपने अधिकारी को पहचानते थे, इसलिए उसे बातों में उलझाकर राजामंडी थाने ले आई । थाने में उससे पहचान पत्र दिखाने को कहा गया, जिस पर पर्सनल नोमिनेशन नंबर दस अंकों में था । जबकि यह नंबर नौ अंकों का ही होता है । आरोपी के पास से उप्र पुलिस के फर्जी पहचान पत्र, दो मोबाइल तथा दो सिम बरामद किए गए हैं । पहचान पत्र पर एसपी जीआरपी आगरा की मोहर लगी हुई है । गौतम ने बताया कि नरेश काफी शातिर बदमाश है । वह कभी सीबीसीआइडी का इंस्पेक्टर तो कभी जीआरपी का इंस्पेक्टर बनकर वेंडरों और यात्रियों से अवैध वसूली करता था ।
40 हजार मिलता था वेतन
नरेशचंन्द्र ने पुलिस को बताया कि इटावा में सरकारी कॉलेज में प्रिंसीपल था । उसे 40 हजार रुपए वेतन मिलते थे । वहां रुपयों की हेराफेरी कर दी । गबन के आरोप में उसे निलंबित कर दिया गया ।
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