आगरालीक्स..हरियाली तीज 15 अगस्त को. इस बार दुर्लभ त्रि-योग शिव, सिद्ध और रवि के महासंयोग के साथ मनेगी तीज. जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा
सावन मास का सबसे बड़ा सुहाग पर्व हरियाली तीज इस वर्ष 2026 में अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोगों में मनाई जाएगी। ज्योतिष पंचांग के अनुसार इस बार तीज का पर्व स्वतंत्रता दिवस के दिन पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया कि हरियाली तीज को श्रावणी तीज, सिंजारा तीज और छोटी तीज के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने सैकड़ों वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था।पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त 2026, शुक्रवार को शाम 06:46 बजे से होगा और समापन 15 अगस्त 2026, शनिवार को शाम 05:28 बजे पर होगा। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की उदयातिथि के आधार पर व्रत और पूजन 15 अगस्त शनिवार को ही मान्य होगा।
पूजन के लिए दो श्रेष्ठ मुहूर्त रहेंगे -
प्रातः मुहूर्त -
सुबह 07:29 से 09:08 बजे तक
दोपहर/प्रदोष मुहूर्त -
दोपहर 12:25 से शाम 05:22 बजे तक
ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि पूजा का शुभ समय तृतीया तिथि में ही माना जाता है, इसलिए शाम 05:28 से पहले ही पूजन सम्पन्न करना उत्तम रहेगा। 15 अगस्त को शाम 05:28 के बाद तृतीया समाप्त हो जाएगी, इसलिए पूजा इसी समय से पहले सम्पन्न करने का प्रयास करें।
2026 में बन रहा है महासंयोग -
इस वर्ष हरियाली तीज पर ग्रह-नक्षत्रों का अद्भुत मेल बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस दिन शिव योग, सिद्ध योग और रवि योग का एक साथ संयोग रहेगा।
शिव योग: शिव पूजन के लिए यह योग अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी माना जाता है। इसमें की गई साधना से समस्त कष्ट दूर होते हैं।
सिद्ध योग: इस योग में किया गया व्रत, दान और मंत्र जाप अक्षय फल देता है।
रवि योग: यह सभी अशुभ योगों का नाशक है। शास्त्रों में रवि योग को हर कार्य को सफल बनाने वाला कहा गया है। शनिवार को पड़ने वाली तीज पर ऐसा त्रि-योग संयोग वर्षों बाद बनता है।
व्रत का महत्व - हरियाली तीज का व्रत हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए तथा अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं। यह एक निर्जला व्रत है जिसे बिना अन्न और जल के रखा जाता है। ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की यह पर्व केवल व्रत नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने का पर्व है। सावन में जब हर तरफ हरियाली छा जाती है तो महिलाएं झूला झूलकर, लोकगीत गाकर और सोलह श्रृंगार कर प्रकृति और प्रेम का उत्सव मनाती हैं।
धार्मिक महत्व और लाभ -अखंड सौभाग्य का व्रत: यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए तथा अविवाहित लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं। यह एक निर्जला व्रत है जिसे बिना अन्न-जल के रखा जाता है।
प्रकृति से जुड़ाव: हरियाली तीज पर्व प्रकृति से जुड़ने का पर्व है। जब ये पर्व आता है तो हर तरफ हरियाली छा जाती है।
उपाय: जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा है या जिनके वैवाहिक जीवन में क्लेश है, उनके लिए इस दिन शिव-पार्वती को बेलपत्र, भांग, धतूरा और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
