आगरालीक्स…सोमवार 31 अगस्त को कजरी तीज. उत्तमकारी संयोग मे सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं का खास पर्व…जानें इसका महत्व व पूजा के शुभ मुहूर्त
हर साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की विवाहित महिलाओं के लिए यह पर्व बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, दांपत्य जीवन में सुख-शांति और संतान की कामना के लिए व्रत रखती हैं. जबकि अविवाहित लड़कियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रख सकती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान बताया गया है. पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त दिन रविवार को सुबह 09:38 बजे से लेकर 31 अगस्त दिन सोमवार को सुबह 08:52 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त दिन सोमवार को रखा जाएगा.
पूजा के शुभ मुहूर्त –
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:29 से 05:14 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:56 से दोपहर 12:47 तक – पूजा के लिए सबसे उत्तम
अमृत चौघड़िया: सुबह 05:58 से 07:34 बजे तक
शुभ चौघड़िया: सुबह 09:10 से 10:45 तक
लाभ चौघड़िया: दोपहर 03:33 से शाम 05:08 तक – संध्या काल मुहूर्त: शाम 06:44 से 07:51 तक
चंद्रोदय का समय : कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है। 31 अगस्त की रात लगभग 08:30 से 09:15 बजे के बीच चंद्र दर्शन की संभावना है।
कजरी तीज का महत्व –
कजरी तीज को बूढ़ी तीज, सातुड़ी तीज और नीमड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से उत्तर भारत – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में बड़े उत्साह से मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी और इसी तिथि पर कजरी तीज का व्रत रखा था। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक बन गया।
सुहागिन महिलाओं के लिए : पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए
कुंवारी कन्याओं के लिए : मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है
इस दिन सोलह श्रृंगार, झूला झूलने, कजरी गीत गाने और सुहाग की वस्तुओं का दान करने की परंपरा भी है।
इस दिन बनने वाले शुभ योग और संयोग –
त्रि-पर्व महासंयोग –
पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को एक ही दिन तीन बड़े व्रत एक साथ पड़ रहे हैं –
कजरी तीज – पति की लंबी उम्र के लिए
बहुला चौथ – बच्चों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए • हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी – संकटों और पापों से मुक्ति के लिए
गणेश जी का व्रत
जब एक ही दिन तीन पर्व पड़ते हैं तो उसका आध्यात्मिक फल कई गुना माना जाता है।
सोमवार का संयोग –
कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है, इस बार यह सोमवार को है। सोमवार भगवान शिव का दिन है और कजरी तीज पर शिव-पार्वती की ही पूजा होती है, इसलिए यह उत्तमकारी संयोग अति शुभ है। साथ ही अभिजीत मुहूर्त और अमृत चौघड़िया जैसे शुभ योग बन रहे हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य का योग
तीनों व्रत – कजरी तीज, बहुला चौथ और संकष्टी चतुर्थी में रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद ही व्रत खोला जाता है। इस दिन चंद्रमा का विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इस कारण ज्योतिष में कहा जा रहा है कि इस साल कजरी तीज का व्रत करने से सिर्फ सुहाग ही नहीं, संतान सुख और विघ्न-बाधाओं से मुक्ति का भी आशीर्वाद एक साथ मिलेगा।