आगरालीक्स…सावन की पहली एकादशी 9 अगस्त को, द्विपुष्कर और हर्षण योग में होगी पूजा, जानें महत्व और विधि –
सावन माह भगवान शिव और विष्णु दोनों की आराधना का पवित्र महीना है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से शुरू हो गया है और यह 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। सावन मास की पहली एकादशी कामिका एकादशी 9 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी। यही सावन की प्रथम एकादशी होगी।
तिथि और शुभ योग –
पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ होगी और 9 अगस्त को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा।
इस दिन पूजा के लिए दो विशेष शुभ योग बन रहे हैं।
- द्विपुष्कर योग – सुबह 11:04 बजे से दोपहर 2:43 बजे तक।
- हर्षण योग – प्रातःकाल से शुरू होकर 10 अगस्त की रात 2:04 बजे तक रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार द्विपुष्कर योग में किया गया दान-पुण्य दोगुना फल देता है। व्रत का पारण अगले दिन 10 अगस्त को सुबह 6:05 से 8:38 बजे के बीच किया जाएगा।
धार्मिक महत्व –
सावन में पड़ने वाली कामिका एकादशी को मोक्षदायिनी एकादशी कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
शास्त्रों में उल्लेख है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से तीर्थ स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। सावन का महीना शिव का प्रिय महीना है, ऐसे में इस दिन हरि और हर दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
पूजा विधि –
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। पूजा चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। गंगा जल से अभिषेक कर पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें।
भगवान को सात्विक भोग लगाएं और भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें। मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी है। इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें और कामिका एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती कर पूजा पूर्ण करें।
विशेष सावधानी : एकादशी के दिन चावल का सेवन न करें और तुलसी के पत्ते न तोड़ें।