
गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल-कॉलेज खुलेंगे तो बच्चों को मैगी से होने वाले नुकसान के बारे में समझाया जाएगा। साथ ही कैंटीन में इसकी बिक्री नहीं होगी। इसके लिए नोटिस बोर्ड पर मैगी के नुकसान को भी चस्पा किया जाएगा। अप्सा संस्था के अध्यक्ष संजय तोमर का कहना है कि मैगी के अलावा अन्य चाइनीज फूड आइटम्स में मोनो सोडियम ग्लूटामेट मिलाया जाता है, जो 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए हानिकारक है। पेरेंटस को घरों में भी इस तरह आइटम्स खाने पर रोक लगानी चाहिए। उनका कहना है कि द काउंसिल ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) को पत्र लिखा जाएगा। जिससे देशभर के स्कूल-कॉलेजों में मैगी के अलावा अन्य चाइनीज फूड आइटम्स को लेकर आने और कैंटीन में इनकी बिक्री पर रोक लग सके।
अप्सा सचिव सुशील गुप्ता का कहना है कि संबंधित स्कूल-कॉलेजों में आदेश का कितना पालन हो रहा है। इसका पता लगाने के लिए टीम गठित की जाएगी। जो स्कूल-कॉलेजों की निगरानी करेगी।
अप्सा सदस्य व सेंट पीटर्स कॉलेज के प्रधानाचार्य फादर पाल तानिकल का कहना है कि ओपन डे में मैगी और फास्ट फूड से होने वाले नुकसान के बारे में बच्चों को जागरूक किया जाएगा।
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