कहानी
फिल्म की कहानी कायरा यानी की आलिया भट्ट की है, जिसने सिनेमेटोग्राफी का कोर्स किया है और छोटे छोटे विज्ञापन डायरेक्ट करती रहती है। कायरा की तमन्ना है कि वो जल्द ही एक डायरेक्टर के तौर पर फिल्म करे, लेकिन कहानी में कुछ ट्विस्ट आता है। कुछ सवालों के जवाब जानने के लिए वो हर दिन जूझती रहती है। कहानी में समय-समय पर कुछ किरदार जैसे प्रोड्यूसर रघुवेन्द्र यानी की कुनाल कपूर , होटेलियर सिड यानी की अंगद बेदी और सिंगर रूमी यानी की अली जफर आते हैं जिनके साथ कायरा थोड़ा वक्त गुजरती है। लेकिन अचानक उसकी मुलाक़ात थेरेपिस्ट जग यानी की शाहरुख खान से होती है, जिसकी बातों को सुनना कायरा को काफी पसंद आने लगता है। जिंदगी से जुडे सवालों का जवाब कायरा को मिल पाता है? इसका पता आपको थिएटर तक जाकर ही चल पाएगा।
डायरेक्शन
गौरी शिंदे ने एक बार फिर कमाल का डायरेक्शन किया है। ‘इंग्लिश-विंग्लिश’ के बाद यह गौरी शिंदे की डायरेक्टर के तौर पर दूसरी फिल्म है। फिल्म की कमजोरी इसकी अवधि है।
परफॉर्मेंस
आलिया भट्ट की परफ़ॉर्मेंस को देखकर कह सकते हैं कि वो इस पीढ़ी की सर्वोत्तम अभिनेत्री हैं, जिनके पास एक्सप्रेशंस की कमी नहीं है। आलिया आपको कभी हंसाती हैं तो कभी कभी आंखें नम करने पर विवश भी करती हैं। वहीँ फिल्म में अंगद बेदी, कुनाल कपूर और अली जफ़र का काम भी सहज है। शाहरुख खान जब भी स्क्रीन पर आते हैं, एक अलग तरह की ऊर्जा थिएटर में दिखाई पड़ती है। शाहरुख जिंदगी की कुछ अहम बातों पर भी एक सरल अंदाज में रोशनी डालते हैं।
म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक एक बार फिर से अमित त्रिवेदी ने बेहतरीन दिया है, फिल्म का टाइटल ट्रैक और बाकी गाने फिल्म के हिसाब से करेक्ट हैं।
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