आगरालीक्स…आगरा में शॉर्ट फिल्म ‘कफन’ का हुआ मुहूर्त. चार दोस्तों की ऐसी सच्ची कहानी जो सबसे बड़े धर्म इंसानियत को सिखाएगी.
अलग-अलग धर्म से जुड़े चार दोस्तों की सच्ची कहानी आरए मूवीज के बैनर तले बन रही शार्ट फिल्म कफन के माध्यम से लोगों को सबसे बड़े धर्म इंसानियत का पाठ सिखाएगी। वो इंसानियत जिसे लोग कभी पैसे के नशे तो कभी धार्मिक कट्टरपंथी के कारण भूल जाते हैं। फिल्म का मुहूर्त आज जयपुर हाउस स्थित रामलीला पार्क में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख, उप्र एवं उत्तराखंड कृपाशंकर ने गणेश पूजन के साथ फ्लैप करके व श्रीफल फोड़कर किया। उन्होंने कहा कि सभी मिलजुल बिना किसी भेदभाव के रहें तो इसांनों के लिए धरती स्वर्ग बन जाए। इंसानियत हर मनुष्य का धर्म है। अतीत की स्मृतियों को संजो कर जब फिल्में बनेगी तो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को प्रेणना देने वाली होंगी। सबको साथ लेकर भारत को विश्व गुरु बनाने में शार्ट फिल्म की बहुत बड़ी भूमिका होगी।
फिल्म निर्माता रंजीत सामा ने फिल्म की कहानी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फिल्म में ऐसे चार दोस्तों की कहानी है जो अलग-अलग धर्म से हैं। वह पार्क में हर रोज मिलते हैं। एक दूसरे के सुख दुख बांटते हैं और किसी एक विषय पर चर्चा करते हैं। आज की चर्चा का विषय धर्म के रंग था। जिस पर चर्चा हो ही रही थी कि राम नाम सत्य… कहते हुए एक अर्थी गुजरी। सभी ने अपनी-अपनी पद्दति से उसका सम्मान किया। पार्क में मधुमेह जांच शिविर आयोजित करवा रही पास खड़ी यह सब देख रही डॉ. वसुन्धरा। सभी धर्मों के लोग को अर्थी का सम्मान करना तो अच्छा लगा परन्तु धर्म के रंग पर बहस करना नहीं।
डॉ. वसुन्धरा द्वारा चारों दोस्तों से किए गए संवाद में एक ऐसा संदेश था जो चारों दोस्तों को आत्मचिन्तन के लिए मजबूर करता है। वह संदेश था कि जब हम जन्म देने वाली मां का सम्मान करते हैं तो 140 करोड़ लोगों को निस्वार्थ और बिना किसी भेदभाव के जल, अन्न और रहने के लिए आवास देने वाली भारत माता का जयकारा लगाने में कैसी शर्म। समस्त ब्रह्माड को चलाने वाले ने हवा, धूप, जल देने में किसी के साथ की भेदभाव नहीं किया तो भला हम कौन होते हैं, अलग-अलग धर्मों के माध्यम से एक दूसरे को अलग या हीन समझने वाले। पूजा पद्दति अलग-अलग हो सकती है परन्तु हर मनुष्य का धर्म तो इंसानियत ही है। फिल्म के एक भावपूर्ण दृश्य में मधुमेह जांच शिविर व गुजरती हुई अर्थी के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है कि सभी का अंत एक ही है। जिसका रंग कफन के रूप में सफेद है। अंत में मिलना सभी को मिट्टी में ही है। फिल्म के निर्माता रंजीत सामा, विजय सामा, सहनिर्माता संजय दुबे, कहानी राहुल गुप्ता की है। फिल्म का निर्देशन हेमन्त कुमार वर्मा ने किया है। सह निर्माता अनिल लाल अरोड़ा है। फिल्म में उमाशंकर मिश्रा, संजय दुबे, शकील खान, मुकेश नेचुरल ने चार दोस्तों का किरदार निभाया है। डॉ. वसुन्धरा के रूप में सोमा जैन नजर आएंगी।इस अवसर पर मुख्य रूप से बांकेलाल जी संरक्षक संस्कार भारती, कीर्ति जी ब्रज प्रांत के प्रांत प्रचार प्रमुख, गोपाल गुप्ता, एमएलसी विजय शिवहरे, प्रशांत पौनिया, बाबू भाई, संजय गोयल, मयंक जैन, संजय जटाना, अनिल लाल, अजय शर्मा, महेश धाकड़, सूरज तिवारी, अवधेश रावत, गिर्राज बंसल, अरविन्द शर्मा, राजेन्द्र, नीरज तिवारी, रितेश, मेकअप मैन रोहित डंडौतिया, जय गुप्ता आदि उपस्थित थे।