आगरालीक्स ….आगरा मेें नालों का शोधित किए बिना यमुना में जाने पर नगर निगम पर 58.39 लाख करोड़ का जुर्माना, एनजीटी ने पूछा था क्या यमुना का जल पी सकते हो, एक डॉक्टर की याचिका पर एनजीटी के सख्त आदेश।
आगरा के पिडियाट्रिक सर्जन व एक्टिविस्ट डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी में 2022 में याचिका की थी, इसमें उन्होंने यमुना के अत्यधिक प्रदूषित होने, डिजाल्व औक्सीजन कम होने के कारण मछलियों के मरने और नदी का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की बा कही थी। कहा था कि आगरा शहर के 61 नालों का शोधित किए बिना गंदा पानी यमुना में पहुंच रहा है, जिससे गंदगी जमा हो रही है। उन्होंने शहर में नालों के गंदी पानी के शोधन के लिए लगाए गए एसटीपी पर भी सवाल उठाए थे। इस मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा था कि क्या यमुना का पानी पी सकते हैं।
नगर निगम आगरा के साथ ही मथुरा व्रंदावन पर जुर्माना
इस मामले में एनजीटी की सात दिसंबर को सुनवाई हुई, इसका अब आदेश जारी किया गया है। नगर निगम आगरा की लापरवाही मानते हुए 288 दिनों तक की अवधि के लिए 58.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, इसी तरह के एक और मामले में मथुरा व्रंदावन नगर निगम पर 7.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही यपीपीसीबी को जल अधिनियम 1974 और गंगा नदी आदेश 2016 का उल्लंघन करने के कामले में संबंधित अधिकारियों के विरुदृध शिकायत दर्ज कराते हुए तीन महीने में कार्रवाई शुरू करनी होगी। पर्यावरण सुधार के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यूपीपीसीबी और डीएम की संयुक्त समिति योजना तैयार करेगी।