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Obtaining children and ambitions is possible with the fasting of Putrada Ekadashi, know the importance and method of worship

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आगरालीक्स…. श्रावण शुक्ल पवित्रा (पुत्रदा) एकादशी 8 अगस्त को है। संतान देने वाली इस एकादशी का  महत्व, मुहूर्त एवं पूजा विधि समेत विस्तृत

भगवान विष्णु को प्रिय है पुत्रदा एकादशी

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार के स्वामी ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक श्रावण पवित्रा (पुत्रदा) एकादशी, जैसा कि नाम से ही विदित है श्रावण महीने में मनाई जाती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।  इसलिए एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा एवं उपासना की जाती है।

विधि-विधान से पूछा से मनोवांछित फल की प्राप्ति

सावन के महीने में आने के कारण ही यह एकादशी श्रावण एकादशी कहलाती है। पवित्रा (पुत्रदा) एकादशी होने से यह संतान देने वाली एकादशी भी मानी जाती है। इस प्रकार श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी जहां एक ओर पूरे विधि-विधान से पूजा करने के कारण और व्रत रखने के कारण आपकी सभी मनोवांछित इच्छाएं पूरी करती है, तो वहीं जो लोग संतान सुख से वंचित हैं, उन्हें उत्तम संतान भी प्रदान करती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है

इस वर्ष यह व्रत सोमवार 08 अगस्त को रखा जाएगा। पारणा अगले दिन 09 अगस्त को होगा। एकादशी तिथि 07अगस्त रविवार, रात 11:50 से प्रारम्भ होगी 8 अगस्तको रात 09:00बजे तक रहेगी। अतः श्रावण शुक्ल पवित्रा पुत्रदा एकादशी व्रत 08 अगस्त को रखा जाएगा और उसकी पारणा अगले दिन होगी।

एकादशी व्रत की पारणा मुहूर्त निम्नलिखित है:

🏵श्रावण पवित्रा(पुत्रदा) एकादशी व्रत (08 अगस्त)

♦श्रावण पवित्रा(पुत्रदा) एकादशी पारणा मुहूर्त

♦09अगस्त 2022 की प्रातः 05:12:02 से 07:47:48 तकअवधि 2 घंटे 35 मिनट

श्रावण शुक्ल पवित्रा (पुत्रदा) एकादशी का महत्व

💥 भगवान विष्णु को प्रिय पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है। एक बार श्रावण मास में और दूसरी बार पौष मास में। उत्तर भारत में पौष मास की पुत्रदा एकादशी अधिक मनाई जाती है तो अन्य क्षेत्रों में श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी का अत्यंत महत्व है।

🏵 पुराणों के अनुसार भूमि दान, अन्न दान, स्वर्ण दान, गोदान, कन्यादान या फिर ग्रहण काल में स्नान दान करने से जितना पुण्य प्राप्त होता है अथवा कठिन तपस्या, अश्वमेध यज्ञ और तीर्थ यात्रा से जो पुण्य होता है, उससे भी अधिक पुण्य एकादशी तिथि का व्रत रखने से प्राप्त होता है।

♦श्रावण पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि

🌻श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन जो लोग व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें पूरे विधि-विधान से और पूजा विधि को जानकर व्रत रखना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की कोई त्रुटि न रह जाए। आप निम्नलिखित विधि के द्वारा भी इस एकादशी के व्रत का पालन कर सकते हैं:

🌷 जो लोग श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें एक दिन पूर्व अर्थात द्वादशी तिथि की संध्या को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए।

🌟व्रत के दिन से लेकर पारणा के दिन तक संयमित जीवन व्यतीत करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

☘प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठें और फिर स्नान करके नवीन अथवा स्वच्छ वस्त्र धारण करें तथा शुद्ध हो जाएँ।

🌸इसके बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र रखें और उसके समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं।

💥दीपक जलाने के बाद श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत रखने का संकल्प लें।

🏵भगवान् श्री हरी विष्णु जी की पूजा से पहले गणेश जी की पूजा करें क्योंकि वे प्रथम पूज्य हैं।

उनके बाद भगवान विष्णु की पंचोपचार व षोडशोपचार पूजा करें।

🌟उन्हें पुष्प, मौसमी फल, तुलसी पत्र तथा चंदन, आदि अर्पित करें।

🌺इसके बाद पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा पढ़ें अथवा सुनें और दूसरों को सुनाएं।

🌷कथा समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु की पूरे मन से प्रसन्नता पूर्वक आरती करें।

🍁ध्यान रखें आप को निराहार रहना है और अन्न को ग्रहण नहीं करना है, हालांकि आप फलाहार कर सकते हैं।

🌻शाम के समय दूध या दूध से बनी कोई वस्तु, खोया से बनी मिठाई, कुट्टू के आटे से बना भोजन करें। आप सेंधा नमक और काली मिर्च का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन भूल कर भी सादा नमक या काला नमक और लाल मिर्च का प्रयोग न करें।

🌸इस दिन श्री विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र का पाठ करना अत्यंत ही फलदायक माना जाता है।

एकादशी तिथि का व्रत रखने वाले लोगों को रात्रि में जागरण और भजन-कीर्तन करना चाहिए।

इसके बाद अगले दिन सूर्योदय के उपरांत व्रत की पारणा की जाती है।

Written by
Agraleaks Team

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