आगरालीक्स…रामनवमी पर घर—घर में होगी मां सिद्धिदात्री की पूजा. हलुवा चने का लगेगा भोग. जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूत, पूजा विधि और मंत्र
चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (9) दिन रविवार पुष्य नक्षत्र सुकर्मा योग बालव करण के सुखद संयोग में 06 अप्रैल 2025 को ही रामनवमी, दुर्गा नवमी मनाई जायेगी. अतः इसी में (माता सिद्धिदात्री )की पूजा पाठ मान्य होगी.
मां का चोला (लाल) रंग का
शुभ रंग (बैंगनी)
भोग में पसंद नारियल, हलुवा, चना, पूड़ी का भोग लगाने से हर प्रकार की खुशहाली सुख समृद्धि प्राप्त होती है
देवी भगवती का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री का है. नवरात्रियों में जिन नौ दुर्गाओ की आराधना की जाती है. वह मूलतः एक ही है, किंतु लौकिक रूप में नवदुर्गा (नौदेवी) कहा जाता है. आखिरी दिन शक्ति के जिसरूप की आराधना की जाती है वह मां सिद्धिदात्री की आराधना ही हैं. इनके आशीर्वाद के बिना व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण नहीं होती. मार्कंण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्वये आठ प्रकार की सिद्धियां कहीं गई है. पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को आठ सिद्धियां और नौ निधियों से पूर्ण कर देती हैं. इनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर नारी का हुआ. जिसके कारण वे अर्धनारीश्वर कहलाए. मां अपने हाथ में गदा, कमल पुष्प, शंख और चक्र धारण करती हैं. इनका वाहन सिंह है. जिस साधक ने इन को प्राप्त कर लिया वह सुख समृद्धि का प्रतीक हो गया. अर्थ पाना कठिन नहीं है अर्थ को सिद्ध करना बड़ा अर्थ रखता है. यह माता महालक्ष्मी जी का स्वरुप है. इनकी आराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का पारण होता है. मां की उपासना के साथ दुर्गा जी के मंत्र से ध्यान करना चाहिए ध्यान के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं श्रेष्ठ निर्माण
मंत्र “ॐ ऐंग हीलीम क्लीम चामुंडायै विच्चै
इस मंत्र की यथासंभव 2,5,7,9 या 11 माला हवन करना चाहिए हवन सामग्री में शहद गुगल और दशांगका प्रयोग अवश्य करें कन्या पूजन कर उन्हें भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें इस प्रकार मां सिद्धिदात्रीकी कृपा आपके परिवार पर वर्ष भर बनी रहेगी.
दूसरा अचूक मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यैनमो नमः
सिद्धियां प्रदान करने वाली है माता सिद्धिदात्री
सिद्धिदात्री देवी उन सभी भक्तों को महाविद्याओं की अष्ट सिद्धियां प्रदान करती हैं जो सच्चे मन और विधि विधान मां की आराधना करते हैं. नवरात्र पूजन के अंतिम दिन भक्तों और साधक माता सिद्धिदात्री की शास्त्रीय विधि-विधान से पूजा करते हैं. माता सिद्धिदात्री चतुर्भुज और सिंहवाहिनी है. गति के समय वे सिंह पर तथा अचल रूप में कमल पुष्प के आसन पर बैठती हैं. माता के दाहिनी ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र और ऊपर वाले दाहिनी हाथ में गदा रहती है. बाई ओर के नीचे वाले हाथ में शंख तथा ऊपर वाले हाथ में कमल पुष्प रहता है.
पूजा विधि एवं कन्या लांगुरा जिमाने के शुभ मुहूर्त
विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार प्रातः 07:51 बजे से दोपहर 12:26बजे तक” चर”लाभ और अमृत” के तीन बहुत ही बेहतरीन चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होंगे. इसमें सन्यासी एवं नौकरीपेशा लोगों के लिए बहुत ही सर्वोत्तम मुहूर्त कहलाए जाएंगे. इसके बाद में दोपहर 01:05 से दोपहर 03:21 तक” शुभ “का बहुत ही उत्तम मुहूर्त रहेगा जिसमें व्यापारी वर्ग के लोग एवं वह लोग जो रोग दोषो से पीड़ित हैं या जिन कन्याओं की विवाह शादी में दिक्कत,अडचन, परेशानियां हैं या जिन माताओं बहनों के संतान में बाधा है उन लोगों के लिए यह मुहूर्त सर्वोत्तम कहा जाएगा. इसमें पूजा पाठ करने से समस्त प्रकार के दुखों समाप्त हो जाते हैं.
पूजा विधि
प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा घर को साफ शुद्ध करें पूजा स्थल को चूने खड़िया से पोते इसके बाद 9 वर्ष तक की एक कन्या से उसके हाथ का शुभ पोते हुए स्थान पर हल्दी ,चंदन या रोलीथापा जरूर लगवाएं जिसे स्वयं मां का स्वरूप मानते हैं. कन्या को यथायोग्य दक्षिणा और उपहार देकर विदा करें उसके पैर छूए आशीर्वाद लें इसके बाद हवन, यज्ञ, पूजा, पाठ एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ मंत्र जाप करने के पश्चात कन्या लागुराओ को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. व्रत रखने वाले लोग कन्या लागुरा के भोजन की जूठन में से थोड़ा सा प्रसाद स्वरूप भोजनअवश्य लें. यह मां का प्रसाद समझकर ही ले. इससे व्रत रखने वालों की समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है क्योंकि पूजा-पाठ का मतलब केवल हमारी सच्ची आस्था और विश्वास से होता है.
प्रसिद्ध (ज्योतिषाचार्य)परमपूज्य गुरुदेव पंडित ह्रदयरंजन शर्मा (अध्यक्ष) श्री गुरु ज्योतिषशोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981,7500048250