आगरालीक्स…प्लेटलेट्स…आपके रक्त में मौजूद जीवनरक्षक कोशिकाएँ. जानिए क्यों महत्वपूर्ण होती हैं प्लेटलेट्स..पुष्पांजलि हॉस्पिटल के हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. रोहित मंगल ने दी महत्वपूर्ण जानकारियां
जब हम रक्त के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर केवल लाल रंग के तरल को ही ध्यान में रखते हैं। लेकिन यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि हमारे रक्त में कई प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं - प्रत्येक का कार्य हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इनमें लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs), जो ऑक्सीजन पहुंचाती हैं; श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs), जो संक्रमण से लड़ती हैं; और बेहद महत्वपूर्ण लेकिन कम पहचानी जाने वाली प्लेटलेट्स शामिल हैं - जो रक्तस्राव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस संबंध में पुष्पांजलि हॉस्पिटल के हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. रोहित मंगल ने बताया कि अपने हेमेटोलॉजी के अभ्यास में मैंने देखा है कि अधिकांश मरीज प्लेटलेट्स की भूमिका और उनकी संख्या में गिरावट के खतरों से अनजान रहते हैं। इस लेख के माध्यम से मैं प्लेटलेट्स के कार्य, उनकी कमी के कारणों और सुरक्षा के उपायों पर प्रकाश डालना चाहता हूँ।प्लेटलेट्स क्या हैं?
प्लेटलेट्स या थ्रोम्बोसाइट्स, रक्त में पाई जाने वाली अत्यंत सूक्ष्म लेकिन प्रभावशाली कोशिकाएँ हैं जो अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में बनती हैं। इनका मुख्य कार्य रक्तस्राव को रोकना है। चोट या आंतरिक क्षति की स्थिति में ये सबसे पहले सक्रिय होती हैं – क्षतिग्रस्त स्थल पर पहुँचकर एक अस्थायी “प्लग” बनाती हैं जिससे रक्तस्राव रुक सके।
ये न तो ऑक्सीजन ले जाती हैं और न ही संक्रमण से लड़ती हैं, लेकिन इनके बिना शरीर सामान्य चोट में भी अत्यधिक रक्त बहाव से जूझ सकता है।
प्लेटलेट्स, RBCs और WBCs के बीच संबंध
रक्त की सभी प्रमुख कोशिकाएँ – RBCS, WBCs और प्लेटलेट्स – अस्थि मज्जा में बनती हैं और मिलकर शरीर की जीवन प्रणाली को बनाए रखती हैं।
RBCs: पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाती हैं और कार्बन डाइऑक्साइड हटाती हैं ।
WBCs: शरीर को संक्रमण से बचाने का कार्य करती हैं।
Platelets: रक्तस्राव को रोकने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं।
प्लेटलेट्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?
जब शरीर को चोट लगती है या कोई सर्जरी होती है, तब प्लेटलेट्स रक्तस्राव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि इनकी संख्या कम हो जाए, तो शरीर अंदरूनी रक्तस्राव का शिकार हो सकता है. विशेष रूप से मस्तिष्क, आँतों या पेट जैसे संवेदनशील अंगों में।
इसके अतिरिक्त, प्लेटलेट्स घाव भरने और ऊतकों के पुनर्निर्माण में सहायक रसायनों का स्त्राव भी करती हैं।
प्लेटलेट्स की संख्या में कमी को मेडिकल भाषा में Thrombocytopenia कहा जाता है। इसके प्रमुख कारण हैं:
वायरल संक्रमण: जैसे डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस आदि
ऑटोइम्यून रोग: जैसे ITP या ल्यूपस, जहाँ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली प्लेटलेट्स को ही नष्ट कर देती है
कैंसर और कीमोथेरेपी: अस्थि मज्जा को प्रभावित करती है
शराब का अत्यधिक सेवन
विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी
कुछ एंटीबायोटिक्स व NSAIDs
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण शुरुआत में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन निम्न संकेत चेतावनी स्वरूप होते हैं:
त्वचा पर आसानी से नीले निशान पड़ना
मामूली कट में भी देर तक रक्त बहना
मसूड़ों से खून आना या बार-बार नकसीर
पेशाब या मल में रक्त
अत्यधिक मासिक धर्म
त्वचा पर लाल बिंदु (Petechiae)
यदि इनमें से कोई भी लक्षण मौजूद हो, तो शीघ्र रक्त जांच करवाना अनिवार्य है।
प्लेटलेट्स की कमी के जोखिम
यदि प्लेटलेट्स की संख्या अत्यधिक कम हो जाए, तो यह गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है:
आंतरिक रक्तस्राव (विशेषकर मस्तिष्क में)
ऑपरेशन या प्रसव के समय अत्यधिक रक्त बहाव
संक्रमणों का खतरा बढ़ना
थकान, कमजोरी व घाव भरने में देरी
प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के उपाय
यदि प्लेटलेट्स हल्के स्तर पर कम हों, तो कुछ जीवनशैली संबंधी बदलाव और पोषण सहायता सहायक हो सकते हैं:
पोषण युक्त आहार लें:
पपीते के पत्ते (डेंगू में अत्यंत लाभकारी)
चुकंदर, अनार
विटामिन c युक्त फल
पालक, कद्दू के बीज (आयरन व फोलेट युक्त)
शराब से दूरी और पर्याप्त पानी पीना
NSAIDs जैसे दर्दनाशक दवाओं से परहेज (यदि डॉक्टर न लिखें तो)
डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स जैसे B12, फोलिक एसिड, आयरन
चिकित्सकीय उपचार
जब प्लेटलेट काउंट 20,000/PL से नीचे चला जाए, , तब निम्न उपचार की आवश्यकता होती है:
प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन
स्टेरॉइड्स या IVIG
बोन मैरो स्टिमुलेशन
कारण की चिकित्सा (जैसे संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग)
विशेषज्ञ की सलाह – डॉ. रोहित मंगल
“प्लेटलेट्स भले ही छोटे हों, लेकिन ये आपके शरीर के आपातकालीन मरम्मतकर्ता हैं। इनकी अनदेखी आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। यदि शरीर कोई संकेत दे रहा है, तो उसे गंभीरता से लें और रक्त की पूरी जांच अवश्य करवाएँ।”
- डॉ. रोहित मंगल, हेमेटोलॉजिस्ट,पुष्पांजलि हॉस्पिटल
कब दिखाएँ हेमेटोलॉजिस्ट को
यदि आपको बार-बार ब्लीडिंग होती है
थकावट या कमजोरी बनी रहती है
रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम आ रहे हैं
तो तुरंत हेमेटोलॉजी विशेषज्ञ से परामर्श लें। पुष्पांजलि हॉस्पिटल, आगरा में आधुनिक जांच और उन्नत उपचार की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
डॉ. रोहित मंगल - हेमेटोलॉजिस्ट
१ पुष्पाँजलि हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, आगरा
संपर्क करें: 7505400 400 | व्हाट्सएप : 9389925195
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स्वस्थ प्लेटलेट्स – एक मौन सुरक्षा कवच । इसे टूटने से पहले मजबूत करें।
- डॉ. रोहित मंगल