आगरालीक्स आगरा में हत्या, बलवा, जानलेवा हमला और 7 सीएलए एक्ट में नामजद पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शन के निदेशक बीडी अग्रवाल सहित 17 को बरी कर दिया गया है। 16 साल सात महीने पुराने मामले में साक्ष्य के अभाव में बुधवार को अपर जिला जज शकील उल रहमान ने बीडी अग्रवाल सहित 17 नामजद आरोपियों को बरी कर दिया।
11 जून 2002 को डीएम कार्यालय में डयूटी पर तैनात एसआई एसएस चौहान ने मुकदमा दर्ज कराया था कि सिकंदरा अकबर टूम पर फायरिंग की आवाज सुनकर वे वहां पहुंचे। वहां सिकंदरा हॉस्पिटल के सामने कच्ची सडक के किनारे बाउंड्रीवॉल बनी हुई थी, यहां दो पक्षों के बीच फायरिंग हो रही थी, एक पक्ष प्रमोद भार्गव का था और दूसरे पक्ष के साथ पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शन के निदेशक बीडी अग्रवाल बाहदुर सिंह, सियाराम, विनोद यादव सहित अन्य हथियार लेकर मकानों पर चढे हुए थे। मौके से प्रमोद और उसके नौ साथियों को पकड लिया था, कबाड की दुकान में एक शव मिला था।
केस से निकाल दिया था बीडी अग्रवाल का नाम
इस मामले के विवेचक नरायन सिंह ने विवेचना के दौरान बीडी अग्रवाल और नानकचंद के नाम निकाल दिए थे, यह कहा गया था कि ये दोनों मौके पर नहीं थे, कोर्ट ने दोनों को तलब किया था। इस मामले में 13 गवाह पेश हुए, घटना की एपफआईआर भी चार दिन बाद पुलिस ने पेश की, पुलिस ने इस मामले में म्रतक साबिर की एफआईआर पर एपफआर लगा दी, कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए बरी कर दिया।
ये हुए बरी
पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शन के निदेशक बीडी अग्रवाल, प्रमोद भार्गव, सुनील कुमार, नपफीस, संजेश कुमार, प्रशांत कुमार, लक्ष्मणदास, राजेंद्र नाथ, नरेंद्र कुमार, प्रताप सिंह, सियाराम, विनोद जादौन, शेरा पहलवान, सुरेंद्र सिंह, परिहार, नानकचंद, नरेंद्र कुमार, बहादुर सिंह।