
संत बाबा निरंजन सिंह का जन्म संगरूर (पंजाब) के गांव खेड़ी में हुआ था। पिता मुकंद सिंह थे। स्कूली शिक्षा गांव में ही प्राप्त करने के बाद बाबा ने महज 18 साल की उम्र में परिवार त्यागकर गुरु की सेवा का मार्ग चुना। संत साधु सिंह (मोनी बाबा) के साथ गुरुद्वारा लंगर साहिब हजूर साहिब नादेड़ (महाराष्ट्र) से कार सेवा आरंभ की। इसके बाद वर्ष 1965 में गुरुद्वारा गुरु नानक साहिब धूलिया (महाराष्ट्र) में कार सेवा की। अगस्त 1971 में संत बाबा निरंजन सिंह ने मोनी बाबा के आदेश पर गुरुद्वारा गुरु का ताल में सेवा संभाली। अक्तूबर 1987 में मोनी बाबा के परलोक गमन के बाद बाबा निरंजन सिंह को संगतों ने सेवा सौंपी गई। तभी से वे यहां सेवा संभाल रहे थे। बाबा निरंजन सिंह ने संत बाबा प्रीतम सिंह को साथ लेकर गुरुद्वारे को भव्य स्वरूप प्रदान किया।
कारसेवा के लिए जाने गए
संत बाबा निरंजन सिंह ने संत बाबा प्रीतम सिंह के साथ गुरुद्वारा नानक साहिब बंडा, गुरुद्वारा गुरु नानक शाहजहांपुर, पीलीभीत, गुरुद्वारा छोटे साहिबजादे सितारगंज उत्तराखंड, गुरुद्वारा गुरु नानक बुंगा इंदौर, गुरुद्वारा नानक दरबार कमला नगर में कार सेवा की।
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