आगरालीक्स…आपकी आंखों की रोशनी कितनी तेज, कितना ठीक से दिखाई देता है…अगर ये जानना है तो शरद पूर्णिमा की रात को सुई में धागा पिरोकर दिखाइए…आगरालीक्स के साथ Video भी शेयर कीजिए…पढ़ें पूरी खबर
शरद पूर्णिमा पर चन्द्र-दर्शन करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है. इससे कई प्रकार के रोग दोषो से मुक्ति भी मिलती है और आत्मसन्तुष्टि भी. इस रात को हजार काम छोड़कर 15 मिनट चन्द्रमा को एकटक निहारना। एक-आध मिनट आँखें पटपटाना। कम-से-कम 15 मिनट चन्द्रमा की किरणों का फायदा लेना, ज्यादा करो तो हरकत नहीं। इससे 32 प्रकार की पित्तसंबंधी बीमारियों में लाभ होगा, शांति होगी। फिर छत पर या मैदान में विद्युत का कुचालक आसन बिछाकर लेटे-लेटे भी चंद्रमा को देख सकते हैं। जिनको नेत्रज्योति बढ़ानी हो वे शरद पूनम की रात को सुई में धागा पिरोने की कोशिश करें। इस रात्रि में ध्यान-भजन, सत्संग कीर्तन, चन्द्रदर्शन आदि शारीरिक व मानसिक आरोग्यता के लिए अत्यन्त लाभदायक है। शरद पूर्णिमा की शीतल रात्रि में (9 से 12 बजे के बीच) छत पर चन्द्रमा की किरणों में महीन कपड़े से ढँककर रखी हुई दूध-पोहे अथवा दूध-चावल की खीर अवश्य खानी चाहिए। देर रात होने के कारण कम खायें, भरपेट न खायें, सावधानी बरतें।
शरद पूर्णिमा की रात में सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने की भी परंपरा है। इसके पीछे कारण ये है कि सूई में धागा डालने की कोशिश में चंद्रमा की ओर एकटक देखना पड़ता है। जिससे चंद्रमा की सीधी रोशनी आंखों में पड़ती है। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देने से अस्थमा या दमा रोगियों की तकलीफ कम हो जाती है. शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा की चांदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है. शरद पूर्णिमा की चांदनी का महत्त्व ज्यादा है, इस रात चंद्रमा की रोशनी में चांदी के बर्तन में रखी खीर का सेवन करने से हर तरह की शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती है