नईदिल्लीलीक्स… आदमी अब पहले की अपेक्षा ठंडा होता जा रहा है। धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जबकि मानव शरीर का औसत तापमान लगातार कम हो रहा है। पिछले कुछ सालों में शरीर के तापमान कुछ ज्यादा ही गिरावट आई है।
मानक बदल रहा है
दो सौ साल पहले इन्सानी जिस्म का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 डिग्री फायरन हाइट) माना जाता था। डॉक्टर और बच्चों के माता-पिता इसी को आधार मानकर बुखार नापते आए हैं। जर्मन के ड़ाक्टर कार्ल वुडंरलिच ने पहली बार मानव शरीर का औसत तामपान 37 डिग्री सेल्सियस माना था, लेकिन हाल के वर्षों में यह औसत तापमान लगातार कम हो रहा है।
ब्रिटेन में साल 2017 में 35 हजार वयस्कों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि मनुष्य के शऱीर का औसत तापमान 97.9 डिग्री फायरनेहाइट हो गया है। 2019 में अमेरिका के पालो आल्टो और कैलीफोर्निया के लोगों के शरीर का औसत तापमान 97.5 डिग्री फाइरनहाइट पाया गया।
हर साल हो रही है गिरावट
साइने हेल्थ एंड हिस्ट्री प्रोजेक्ट के सह निदेशक गूर्वन और उनके सहयोगियों शोधकर्ता गत 16 वर्षों से इस पर शोध कर रहे हैं। उन्होंने लोगों के शारीरिक तापमान में तेजी से कमी को रिकार्ड किया। शोधकर्ताओँ के अनुसार यह तापमान हर वर्ष 0.09 डिग्री फायरेनहाइट की दर से कम हो रहा है। गूर्वन की टीम ने 5500 वयस्कों समेत 18 हजार लोगों के नमूने लिए। इस अध्ययन में आसपास के तापमान और शरीर क वजन जैसे कारकों को भी शमिल किया गया था, जो शरीर के तापमान को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
शोध का परिणाम
गूर्वन कहते हैं कि यह साफ है कि इंसान की शारीरिक क्रिया विज्ञान बदल सकता। एक प्रमुख मत यह है कि हमें कम संक्रमण हुए, बेहतरीन साफ-सफाई, वैक्सीन और इलाज मिला। शोधकर्ताओँ का मानना है कि संक्रमण और बीमारियों से कम जुझाने, आधुनिक दवाओं के उपयोग, लोगों में श्रम करने की आदत कम होने जैसे कारण भी इंसान के लगातार ठंडे होते जाते जाने की वजह हो सकती है।