आगरालीक्स…नवरात्र में कल गुरुवार को भी होगी माता के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा. जानिए क्यों कहा जाता है इन्हें चंद्रघंटा. इनकी पूजा पाठ और विधिभी जानें
मां का चोला (केसरी )शुभ रंग (ग्रे),भोग दूध और उस से बनी चीजें दान करने से मां भगवती खुश होती है और समस्त दुखों का नाश करती है
मां दुर्गा की तीसरी स्वरूप का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन किया जाता है। इनका यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता चंद्रघंटा के सिख पर घंटे के आकार का अर्धचन्द्र और हस्त में घंटा है। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। आवाहन, संकल्प और नाद के रूप में आराध्य यह है कि देवी सरस्वती का रुप है। मां चंद्रघंटा की मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने से भक्तों के कष्टों का निवारण शीघ्र कर देती है। इनका वाहन सिंह है। अतः इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। देवासुर संग्राम में देवी जी ने घंटे की नांद से अनेकानेक असुरों का दमन किया। ऐसा शोर और नांद का ऐसा असर हुआ कि असुर काल के ग्रास बन गए। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेतबाधा आदि से रक्षा करती है।
शास्त्रों मे सुर और संगीत दोनों की ही मुद्रा शांत और आत्मा विभोर करने वाली मानी है। सुर और संगीत दोनों को ही वशीकरण का बीज मंत्र समझा गया है। चंद्रघंटा देवी इसी की आराध्य शक्ति है। चंद्रमा शांति का प्रतीक है और घंटा नाद का। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शक्ति का संदेश देती है देवी की आराधना में नाद पर विशेष ध्यान दिया गया है। वादन और गायन (गाना) दोनों ही नाद के प्रतीक है। मां चंद्रघंटा के साधक और उपासक जहां भी जाते हैं। लोग उन्हें देखकर शांति और सुख का अनुभव करते हैं। नवरात्र के तीसरे दिन साधक का मन “”मणिपुर चक्र”” में प्रविष्ट होता है। मां के इस स्वरूप की आराधना के लिए “सिद्ध कुंजिका “स्त्रोत का पाठ मंगल फलदाई माना गया है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परमपूज्य गुरुदेव पंडित ह्रदयरंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp। नंबर-9756402981,7500048250