
यह कहानी है उर्दू के शायर कैफी आजमी की। यह बात उन दिनों की थी, जब कैफी आजमी कॉलेज में थे। वहीं पर उनकी मुलाकात जीवन संगिनी से हुई। आर्थिक रूप से संपन्न और साहित्यक संस्कारों वाली शौकत को कैफी की लेखनी ने काफी प्रभावित किया। इसके बाद प्रेम बढ़ा और दोनों की शादी हो गई। शादी के बाद शौकत ने रिश्ते की गरिमा इस हद तक निभाई कि खेतीबाड़ी में पति के साथ ऐसी जगह रहीं, जहां मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थीं। पति पत्नी के दुख दर्द और इस प्रेम कहानी को शबाना आजमी और जावेद अख्तर ने अपने शब्दों से पिरोकर शानदार बनाया। जसविंदर सिंह की आवाज में गुनगनाए गए गीतों ने इस कथा में चार चांद लगा दिए।
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