
करने सिंगार फिर से प्रकृति सुंदरी का
छोड़ अपना समस्त कामकाज आ गए।
नवकोपलों से सजे द्रुम डालियों के दल
मुस्कुराती कलियों का ले समाज आ गए।
कामनाओं को जगाने सुप्त सपने सजाने
रंग अपना जमाने ऋतुराज आ गए।
वसंतोत्सव के आगाज पर राधास्वामी की गूंज और बच्चों की कव्वाली ने सत्संगियों में अनूठी शक्ति का संचार किया। गुरु का आर्शीवाद पाने और खेत में सेवा के लिए सत्संगियों का मानो सैलाब उमड़ पड़ा। देशभर के सत्संगियों ने वसंतोत्सव की पहली सुबह खेतों में श्रमदान किया।
वसंतोत्सव मनाने के लिए देशभर से राधास्वामी सत्संग सभा के हजारों सदस्य दयालबाग पहुंचे हैं। सत्संगियों के साथ दयालबाग एजूकेशनल इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों ने भी श्रमदान किया। श्रमदान के बाद बच्चों ने बसंत के आगमन पर कव्वाली प्रस्तुत की। राधास्वामी मत के हुजूर महाराज ने भी खेत में श्रमदान किया। इसके बाद बेबी शो के विजेताओं को गुरु महाराज ने आर्शीवाद दिया। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी प्रतिभा दिखाई तो वहीं लोगों ने एक दूसरे को वसंत की शुभकामनाएं दीं।
वसंतोत्सव में दयालबाग में हर तरफ पीली छटा दिखी। हर कोई पीली टोपी और वस्त्र पहने आकर्षक सजावट को निहारता रहा। हजूरी महाराज की कोठी और पवित्र कुआं के साथ ही सत्संग भवन पर भव्य सजावट की गई। प्रदूषण मुक्त एलईडी लाइटों से भवन जगमगाए। दयालबाग की कालोनियों श्वेत नगर, प्रेम नगर, विद्युत नगर, स्वामी बाग, दयालबाग के हर घर में सजावट की गई। सुबह से लेकर देर रात तक दयालबाग में सत्संगियों का हुजूम उमड़ा रहा।
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