
मध्यप्रदेश जबलपुर के कैलाश गिरी ने के पिता सिकोड़ी लाल का 21 वर्ष पूर्व देहांत हो गया। मां श्रीमती अंधी थी, मां ने इच्छा जाहिर की, कि उन्हें चार धाम की यात्रा करनी है। मां की इच्छा को पूरी करने के लिए कावंड बनाई, अपनी मां को कावंड के एक पलडे में बिठाया और प्रभु में लीन होकर अपनी मां के साथ चारों धाम की यात्रा पर निकल पडे। पडाव आते गए और समय गुजरता गया।
20 साल से मां को करा रहे यात्रा
कैलाश गिरी ने जबलपुर से 20 वर्ष दो माह और 18 दिन पहले अपनी यात्रा शुरू की थी। उन्होंने मां को चारों धामों की यात्रा कराई, मंगलवार सुबह वे आगरा में रोहता नगर के पास पहुंचे। उन्हें देखने के बाद लोगों की भीड लग गई। आस पास के गांव के लोग वहां आ गए, जब लोगों को पता चला कि उनकी मां अंधी हैं और कैलाश गिरी उन्हें चारों धामों की यात्रा करा रहे हैं तो उनकी आंखों नम हो गई। यहां महिलाएं भी पहुंच गई। उनकी सेवा की गई। और विश्राम कराया गया।
मथुरा में अंतिम पडाव
20 वर्ष पूर्व हुआ यात्रा का शुरू हुआ यह सिलसिला अंतिम पड़ाव पर है। कैलाशगिरी ने बताया कि चारों धामों की यात्रा लगभग पूरी हो चुकी है। अब मथुरा वृंदावन जा रहे हैं, इसके बाद मां श्रीमती जहां जाने की इच्छा जाहिर करेंगी, उस ओर रुख कर लेंगे। उन्होंने बताया कि जीवन का लक्ष्य अपनी मां को प्रभु के हर तीर्थ, हर धाम के दर्शन कराना ही रह रह गया है।
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