आगरालीक्स.. नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जा रही है।
द्वितीय ब्रह्मचारिणी
नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानि तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना करने से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही सभी मनोवांछित कार्यों को मातारानी पूरा करती हैं।
औषधि कवच
मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप को ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी कहा जाता है। ब्राह्मी औषधि स्मरण शक्ति को बढ़ाने के साथ रक्त संबंधी समस्याएं दूर करती है। स्वर को मधुर बनाती है। मूत्र और रक्त विकारों में यह औषधि काम करती है। इन समस्याओँ से परेशान लोगों को मां के इस स्वरूप की आराधना करनी चाहिए।
मां संदेशा
माता ब्रह्मचारिणी हमें संदेश देती हैं कि जीवन में तपस्सा अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त नहीं होती है। बिना श्रम के सफलता प्राप्त करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। अतः ब्रह्म शक्ति अर्थात समझने व तप करने की शक्ति हेतु इस दिन शक्ति का स्मरण करें।
योग दर्शन
योग दर्शन में यह शक्ति स्वाधिष्ठान में करने से यह शक्ति बलवान होती है और सर्वत्र सिद्धि और विजय प्राप्त होती है।
माता रानी का भोग- मां को मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। माता रानी को पान-सुपाड़ी चढ़ाने के साथ दो सेब का भोग लगाया जाता है। माता को शक्कर का भोग लगाकर दान करने से साधक को दीर्घायु प्राप्त होती है।
मंदिरों के जंगलों से किए दर्शन
आगरा में अनलॉक-5 में भी मंदिरों को खोलने की इजाजत नहीं होने के कारण मंदिरों में सुबह से पहुंचे श्रद्धालुओं को दूर जंगलों से माता रानी के दर्शन ही कर सके। दूर से ही माता रानी को पुष्प अर्पित किए गए। बेलनगंज पथवारी स्थित पथवारी माता का पट बंद होन के कारण श्रद्धालु महिलाओँ ने बाहर से ही दर्शन कर पास में मंदिर के बाहर वेदी पर जलाभिषेक भी किया। न्यू राजा की राजामंडी स्थित चामुंडा मंदिर के बाहर पूजन सामग्री की दुकानें खुली लेकिन मंदिर में सिर्फ बाहर से ही श्रद्धालु दर्शन कर सके। शहर के अन्य मंदिरों में भी कमोबेश यही हाल रहा। बाजार में फल-फूल, मां के श्रृंगार की वस्तुओं, चुनरी समेत विभिन्न सामानों की खरीदारी की गई।