
खंदारी के देवनगर में आर्किटेक्ट शिव कुमार मिश्रा की कोठी में शिवालय पीजी के नाम से हास्टल है। यहां तीसरी मंजिल पर किरायेदार राकेश परिवार सहित रहते हैं। वे टिफिन सर्विस का काम करते हैं। पहली और दूसरी मंजिल पर 12 छात्र रहते हैं। दोपहर तकरीबन 12 बजे राकेश की पत्नी रेनू और कर्मचारी नंदरानी (नगला पदी) किचिन में खाना बना रहीं थीं। इससे सिलेंडर के पाइप ने आग पकड़ ली। लपटें निकलने पर दोनों महिलाएं चीखने लगीं। रेनू ने आग बुझाने का प्रयास किया तो उसका हाथ झुलस गया। नंदरानी के भी चेहरे पर लपट लगी।
आवाज सुनकर रेनू की बेटी शिवानी (14), वर्षा (9), बेटा हर्ष (7), जबकि नंदरानी की पोती कनक (4) और कशिश (5) किचिन की तरफ दौड़ती हुई आ गईं। बच्चे भी आग की लपटों में घिर गए।
शोर सुनकर नीचे की मंजिल पर रहने वाले छात्र कासगंज निवासी आदित्य और शिकोहाबाद निवासी अभिनव पहुंच गए। दोनों इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। राकेश भी आ गया। छात्रों ने सबमर्सिबल पंप से पाइप लगाकर पानी और फायर एस्टिंगुशर से सिलेंडर की आग बुझाई। इसके बाद सिलेंडर को बाहर निकालकर छत पर फेंक दिया। वहीं रसोई में लगी आग को काबू करने के लिए कमरे की छत पर चढ़कर पानी डाला। आधा घंटे में आग बुझाई जा सकी। इसके बाद सभी सकुशल बाहर निकल आए।
आग में रसोई मेें रखा सामान, फ्रिज और फाइबर शीट जल गई। गनीमत रही कि किचिन के बगल के कमरे में आग नहीं पहुंची, नहीं तो ज्यादा नुकसान हो सकता था।
45 मिनट बाद पहुंची दमकल
छात्र साहस नहीं दिखाते तो सात जिंदगी का बच पाना मुश्किल था। छात्रों ने बताया कि आग लगने की सूचना फायरब्रिगेड को तुरंत दे दी गई थी। इसके बावजूद दमकल तकरीबन 45 मिनट बाद घर पहुंची। तब तक आग बुझाई जा चुकी थी।
दहशत में आया परिवार
आग से दहशत में आईं रेनू और नंदरानी के आंसू नहीं रुक रहे थे। बच्चों को अन्य लोगों ने किसी तरह से संभाला। राकेश के चहेरे पर भी खौफ नजर आ रहा था।
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