आगरालीक्स…। विवाह पंचमी बुधवार आठ दिसंबर को है। श्रीराम-सीता विवाह इसी दिन हुआ था। सुखी दांपत्य जीवन के लिए इस दिन पूजा-अर्चना का विधान है।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के मुताबिक देवी सीता और प्रभु श्री राम पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी का रूप थे, जिन्होंनें धर्म की पुनर्स्थापना के लिए धरती पर मानव रूप में अवतार लिया।
माता सीता और प्रभु श्रीराम के विवाह के दिन को आज भी उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मार्गशीर्ष ( अगहन ) महीने की शुक्ल पंचमी ही वह तिथि थी जब प्रभु श्री राम मिथिला में आयोजित सीता स्वयंवर को जीतने के बाद माता सीता से विवाह किया था। इसीलिये इस दिन को विवाह पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है।
कैसे हुआ प्रभु श्री राम व माता सीता का विवाह
यह तो सभी जानते हैं कि प्रभु श्री राम और माता सीता का विवाह स्वयंवर के उपरांत हुआ था जिसमें भगवान श्री राम ने शिव धनुष को न सिर्फ उठाया बल्कि प्रत्यंचा चढ़ाते हुए वह टूट भी गया था। लेकिन स्वयंवर का यह किस्सा रामचरित मानस में हैं, वाल्मिकी रचित रामायण में स्वंयवर का जिक्र नहीं है। वाल्मिकी रामायण में जो लिखा है, उसमें प्रभु श्री राम और माता सीता के विवाह के समय सीता की उम्र केवल 6 वर्ष की थी। प्रभु श्री राम 13 वर्षीय किशोर राजकुमार थे। वाल्मिकी ने किसी स्वयंवर का जिक्र नहीं किया है।
वाल्मिकी रामायण के अनुसार महर्षि विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण मिथिला पंहुचें थे।
खेल-खेल में टूट गया था शिव का धनुष
विश्वामित्र ने ही महाराजा जनक से प्रभु श्री राम को शिव धनुष दिखाने की कही थी। खेल खेल में प्रभु श्री राम ने वह धनुष उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। महाराजा जनक ने यह प्रण ले रखा था कि जो भी इस धनुष को उठा लेगा, सीता का विवाह वह उसी के साथ करेंगें तो इस घटना के पश्चात जनक ने महाराजा दशरथ को बुलावा भेजा और विधिपूर्वक राम और सीता का विवाह करवाया।
इस दिन कई जगह नहीं होते विवाह
विवाह पंचमी का दिन धार्मिक दृष्टि से वैसे तो बहुत शुभ माना जाता है लेकिन कई क्षेत्रों में खासकर नेपाल के मिथिला में क्योंकि माता सीता वहीं प्रकट हुई थी, इस दिन बेटियों का विवाह करना शुभ नहीं माना जाता। इसके पिछे लोगों की यही मान्यता है कि विवाहोपरांत सीता को बहुत कष्ट झेलने पड़े थे।
-मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-सीता के शुभ विवाह के कारण ही विवाह पंचमी का पर्व अत्यंत पवित्र माना जाता है। भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दम्पत्ति माने गए हैं। इस पावन दिन सभी को राम-सीता की आराधना करते हुए अपने सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए प्रभु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।