
वृंदावन में ठाकुर प्रियाकांत जू मंदिर के समीप बने भव्य पंडाल में हेमामालिनी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद मथुरा से गोकुल जाने तक की लीलाओं से शुरूआत करते माखन चोरी, पूतना वध, कालिया मर्दन लीलाओं का वर्णन नृत्य अभिनय के द्वारा किया। समापन गोवर्धन धरण लीला से हुआ। रंग बिरंगी रोशनी में नहाए मंच पर हेमा की भाव भंगिमा देखते ही बन रही थी। सह कलाकारों के साथ कृष्ण की लीलाओं पर सामंजस्य बैठा उन्होंने अनोखा नजारा दर्शकों के समक्ष पेश किया। दर्शक ताली बजाने पर मजबूर हो उठे। नृत्यांगना हेमामालिनी ने अपनी नृत्य शैली से कान्हा को भावांजलि प्रस्तुति की, कान्हा की बाल लीलाओं में वात्सल्य की शरारत है तो नटखट कान्हा का भोलापन और बाल सखाओं के साथ माखन चोरी की लीलाएं। इन्हें नृत्य शैली के माध्यम से हेमामालिनी ने जीवंत कर लिया, दर्शक टकटकी लगाए लीलाओं को देखते रहे और आनंद व प्रेम चरम पर पहुंचने लगा, ऐसा लगने लगा कि लीलाएं चलती रहें और समय ठहर जाए।
वृंदावन रसोत्सव का शुुभारंभ साध्वी ऋतंभरा, देवकीनंदन ठाकुरजी, जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायणदास अग्रवाल ने किया।
कृष्ण की भूमि पर नृत्य शैली की प्रस्तुति
सांसद ने कहा कि उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि कृष्ण की भूमि पर अपनी नृत्य शैली के माध्यम से वह उन्हें भावांजलि प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि बताया कि इन लीलाओं का ऐसा वात्सल्य पूर्ण मंचन इसी धरा पर संभव है। संचालन तपस्या शर्मा ने किया।
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