
दाऊजी मंदिर में हाथों में बाल्टी लेकर मंदिर परिसर में नाचते हुरियारे एकत्रित होना शुरू हुए। मंदिर के अन्दर से बलराम जी की छड़ी रुपी झंडा आया, हुरियारिनों ने उनके कपड़े फाड़ना शुरू कर दिया। कपड़ों को रंग में भिगोकर कोड़ा बनाया उन पर बरसाए, हुरियारों ने दाऊजी महाराज की जयकारे लगते हुए मंदिर की परिक्रमा की।
बलदाऊ ने माखन मिश्री खिलाने को किए आमंत्रित
ऐसा माना जाता है कि बरसाने, नन्दगाँव और गोकुल के बाद की लठामार होली खेलने के बाद बलदाऊ जी ने पूरे बृज के सभी गोपी और ग्वालबालों से कहा कि आप हमारे यहाँ आओ, हम तुम्हे क्षीर सागर में नहलाएंगे, माखन मिश्री खिलाएंगे और आप की होली की थकान मिठायेंगे। इस पर सभी गोपी और ग्वालबाल बलदेव पहुंचे। वहाँ जा कर देखा तो पानी के आलावा कोई व्यवस्था नहीं थी। बलदाऊ भांग के नशे में मस्त थे । ड्रामों में पानी भरा था। फिर क्या था गोपी गुस्से में आ गयी और बलदाऊ जी सहित सभी ग्वालों के कपड़े फाड़कर उनके कोड़े बना कर बरसाए।
हुरंगा के साथ होली का समापन
ब्रज में 40 दिन तक होली चलती है, बरसाना, नंदगांव, व्रंदावन के बाद अन्य स्थानों पर होली होती है। होली के रंग में मस्त होकर हुरियारे मस्ती करते हैं, भांग का सेवन करने के साथ हंसी ठिठोली होती है। इसके बाद दाऊजी का हुरंगा होता है, इसी के साथ होली का समापन हो जाता है।
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