
हाथरस निवासी बुजुर्ग दंपति के दो बेटे थे। बड़ा बेटा बीटेक करने के बाद गुड़गांव में नौकरी कर रहा था, उसकी एक्सीडेंट में मौत हो गई, अब बुजुर्ग दंपति के लिए उनका छोटा बेटा ही सब कुछ था। मगर, वह पढाई कर रहा था, उसे ब्लड कैंसर हो गया।
कीमोथैरेपी से पहले निकलवाए स्पर्म
ब्लड कैंसर होने पर उसे कीमोथैरेपी दी जानी थी, इसके लिए डॉक्टरों ने कहा कि कीमोथैरेपी के बाद वह पिता नहीं बन सकता है। इसलिए इलाज से पहले युवक के स्पर्म निकालकर प्रिजर्व कर लिए जाएं। इन स्पर्म से वह शादी करने के बाद टेस्ट टयूब बेबी के माध्यम से पिता बन सकता है। डॉक्टर की सलाह पर युवक के स्पर्म प्रिजर्व करा लिए गए।
ब्लड कैंसर के इलाज के दौरान मौत, डॉक्टरों ने जगाई उम्मीद
स्पर्म प्रिजर्व करने के बाद ब्लड कैंसर से पीडित युवक का इलाज शुरू हुआ। परिजनों को भी उम्मीद थी कि उनका बेटा बच जाएगा, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इससे उनके बुजुर्ग परिजन टूट गए, अब उनके पास अपने दोनों बेटों की यादें थी और पहाड से जिंदगी सामने थी। इससे वे टूट चुके थे।
म्रत बेटे के स्पर्म से बच्चे पैदा करने का फैसला
बुजुर्ग दंपति ने जीवन हॉस्पिटल, अलीगढ के डॉ. जयंत शर्मा व डॉ. दिव्या चौधरी से संपर्क किया। इस पर उन्होंने उनके म्रत बेटे के स्पर्म से सरोगेट मदर की मदद से बच्चे पैदा करने का विकल्प दिया। इसके बाद एक सरोगेट मदर से कांट्रेक्ट किया गया। उनके म्रत बेटे के प्रिजवर्ड स्पर्म और महिला के एग से टेस्ट टयूब बेबी के माध्यम से भ्रूण तैयार किया गया, इसे सरोगेट मदर के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया गया। नौ अप्रैल को सरोगेट मदर ने सिजेरियन से जुडवा बेटियों को जन्म दिया है। इससे बुजुर्ग दंपति की खुशी का ठिकाना नहीं है। एक बेटी का वजन 2 किलो 900 ग्राम और दूसरी बेटी का वजन 2 किलो 500 ग्राम है।
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