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आगरालीक्स ….वीकेंड पर आगरा का पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया है, न्यूनतम तापमान 31 डिग्री दर्ज किया गया है, इसके 48 डिग्री तक पहुंचने के अनुमान ने होश उडा दिए हैं। शनिवार को दिन भर धूप से लोग तपते रहे, ताजमहल पर पर्यटक बेहाल रहे तो सडकों पर सन्नाटा पसरा रहा। दोपहर में लोग घर और कार्यालय से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। तेज धूप में बाहर निकलने पर सांस फूलने लगी है। बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 18 मई को तापमान 48 डिग्री तक पहुंच सकता है, रविवार को तापमान 45 और सोमवार को 46 डिग्री तक पहुंचने की आशंका है।
हीट स्ट्रॉक का खतरा
तेज धूप के साथ ही हीट स्ट्रॉक का खतरा बढ गया है। पारा 45 डिग्री तक पहुंचने से हीट एग्जास्ट के बाद हीट स्ट्रॉक के केस बढ रहे हैं। इसमें शरीर से पसीना आना बंद हो जाता है, बेहोशी के बाद इलाज न मिलने पर मौत तक हो सकती है। हीट स्ट्रॉक होने पर मरीज के कपडे उतारक ठंडे पानी से शरीर को कपडे से पोंधना चाहिए, जिससे शरीर का तापमान सामान्य हो सके।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस से जहां मौसम बदल रहा है। वहीं, प्रशांत महासागर में पिछले साल उठे अल निनो के प्रभाव से इस बार तापमान एक से दो डिग्री बढ सकता है। इसके लिए मौसम विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। प्रत्येक पांच दिन में अगले 15 दिनों के लिए मौसम विभाग द्वारा चेतावनी जारी की जाएगी।
क्या है अल नीनो
अल-नीनो एक गर्म जलधारा है। यह एक ऐसी मौसमी परिस्थिति है जो प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग यानी दक्षिणी अमरीका के तटीय भागों में महासागर के सतह पर पानी का तापमान बढ़ने की वजह से पैदा होती है. इसकी वजह से मौसम का सामान्य चक्र गड़बड़ा जाता है और बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं.
अल नीनो जलवायु तंत्र की एक ऐसी बड़ी घटना है जो मूल रूप से भूमध्यरेखा के आसपास प्रशांत– क्षेत्र में घटती है किंतु पृथ्वी के सभी जलवायवीय चक्र इससे प्रभावित है। समुद्री जलसतह के ताप–वितरण में अंतर तथा सागर तल के ऊपर से बहनेवाली हवाओं के बीच अंर्तक्रिया का परिणाम ही अलनीनो तथा अलनीना है। पृथ्वी के भूमध्यक्षेत्र में सूर्य की गर्मी साल भर पड़ती है इसलिए इस भाग में हवाएँ गर्म होकर ऊपर की ओर उठती है। इससे उत्पन्न खाली स्थान को भरने के लिए उपोष्ण क्षेत्र से ठंडी हवाएँ आगे आती है किंतु ‘कोरिएलिस प्रभाव’ के चलते दक्षिणी गोलार्ध की हवाएँ बाँयी ओर और उत्तरी गोलार्ध की हवाएँ दाँयी ओर मुड़ जाती है। प्रशांत महासागर के पूर्वी तथा पश्चिमी भाग के जल–सतह पर तापमान में अंतर होने से उपोष्ण भाग से आनेवाली हवाएँ, पूर्व से पश्चिम की ओर विरल वायुदाब क्षेत्र की ओर बढती है। सतत रूप से बहनेवाली इन हवाओं को ‘व्यापारिक पवन’ कहा जाता है। व्यापारिक पवनों के दबाव के चलते ही पेरू तट की तुलना में इन्डोनेशियाई क्षेत्र में समुद्र तल 0।5 मीटर तक ऊँचा उठ जाता है। समुद्र के विभिन्न हिस्सों में जल–सतह के तापमान में अंतर के चलते समुद्र तल पर से बहनेवाली हवाओं प्रभावित होती है किंतु समुद्र तल पर से बहनेवाली व्यापारिक पवनें भी सागर तल के ताप वितरण को बदलती रहती है।
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