
कार्बनडाई आक्साइड लेजर गर्भाशय के सिर्फ उन प्रभावित ऊतकों (टिशू) को नष्ट करता है, जो बीमार हैं या जो हमारे शरीर के लिए समस्या है। स्वस्थ ऊतक इसके प्रभाव से दूर रहते हैं। रेनबो हास्पीटल के निदेशक डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने बताया कि लूज वजाइनल मसल्स को टाइट करने के दो ऑपरेशन भारत में पहली बार इस वर्कशॉप में लेजर विधि से किए गए हैं। जबकि उत्तर भारत में गर्भाशय से सम्बंधित रोगों को लेजर विधि से ऑपरेशन करने की यह पहली वर्कशॉप है, जिसमें चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, चैन्नई, हरियाणा जैसे प्रांतों के लगभग 20 डॉक्टरों को ट्रेंड किया गया है। प्रशिक्षण डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा व दिल्ली के डॉ. राहुल मनचंदा द्वारा दिया गया। इस मौके पर मुख्य रूप से डॉ. अंशिका लेखी, डॉ. श्रवनी, डॉ. निधि जैन, डॉ. अंजली जैन, डॉ. वंदना मित्तल, डॉ. मनोज शर्मा, डॉ. मनप्रीत, डॉ. शेमी बंसल, डॉ. दीक्षा गोस्वामी, डॉ. शैली गुप्ता डॉ. अनुपम गुप्ता, ल्यूमेनिस कम्पनी की टीम आदि उपस्थित थे।
लेजर विधि है कारगर
डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने बताया कि वजाइना की मांसपेशियों का कमजोर हो जाना 40 की उम्र के बाद महिलाओं में आम समस्या है। जिसकी वजह से महिलाएं झिझक और शर्म के कारण खांसी आने, झींक आने पर यूरिन निकलने की समस्या से जूझती रहती हैं। इसकी वजह से यूरिन इनफेक्शन और ड्राइनेस की समस्या भी हो सकती है। लेकिन कार्बनडाई आक्साइड लेजर विधि से वजाइना की मांसपेसियों को टाइट किया जा सकता है। वह भी पेनलेस ऑपरेशन से। जिसमें ऑपरेशन के बाद होने वाली कोई कॉम्पलीकेशन नहीं होते।
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