
उत्तर प्रदेश पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम (यूपीपीजीएमईई) की पहली काउंसिलिग अप्रैल में हुई थी, इस काउंसिलिंग के आधार पर जूनियर डॉक्टरों ने एसएन में प्रवेश ले लिया और दो मई से वे अपनी डयूटी करने लगे हैं। जूनियर डॉक्टरों को 40 से 50 हजार रुपये स्टाइपंड मिलता है। इसी बीच यूपीपीजीएमईई की पहली काउंसिलिंग को निरस्त करने के आदेश आ गए हैं। इसमें कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएचएमएस) के तहत एमबीबीएस करने के बाद कार्य कर रहे अभ्यर्थियों को यूपीपीजीएमईई में 30 फीसद अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। इसके बाद नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। पूर्व में हुए सभी प्रवेशों को रदद करते हुए दोबारा से काउंसिलिंग कर प्रवेश लिया जाए। इससे एसएन में दो मई से काम कर रहे जूनियर डॉक्टरों परेशान हैं। सोमवार को बैनर लेकर जूनियर डॉक्टरों ने प्राचार्य कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि वे आदेश का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो अभ्यर्थी ज्वाइन कर चुके हैं और जूनियर डॉक्टर की डयूटी कर रहे हैं, उनकी सीट किसी और को देना गलत है। 30 पफीसद अतिरिक्त अंक मिलने के बाद पीएचएमएस के अभ्यर्थियों की रैंक बढ जाएगी और सामान्य एमबीबीएस वाले अभ्यर्थियों को उनकी मनपसंद ब्रांच में सीट नहीं मिल सकेगी।
जूनियर डॉक्टरों के उडे होश
साल भर की तैयारी के बाद पीजी में सलेक्शन होने के बाद मनपसंद सीट मिली है, दो मई से जूनियर डॉक्टर की डयूटी भी कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सीट चली जाती है या इस सीट को हटाकर अन्य ब्रांच की सीट एलॉट होती है, यह चिंता जूनियर डॉक्टरों को सताने लगी है, इससे उनके होश उडे हुए हैं।
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