
एबीसी की संस्थापिका डॉ शिवानी चतुर्वेदी ने गुलों में रंग भरे बाद ए नौबहार चलें, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले, कफस उदास है यारों सबा से कुछ तो कहो, कहें तो बहार ए खुदा आज जिक्र ए यार चले से बैठक की शुरूआत की। इसके बाद तो एक के बाद एक शायर फैज अहमद फैज की शायरों से बैठक शायराना अंदाज में आगे चली, अब आगे भी शायरों पर सेशन होते रहेंगे।
बैठक में केन केसी की पुस्तक वन फृलू ओवर कुकूज नेस्ट पर चर्चा की गई, इस कहानी का पात्र आरपी मेकमर्फी एक कैदी है जो मानसिक रोगी होने का ढोंग कर जेल की मेहनत से बचने के लिए मनोचिकित्सालय में जाता है, वहां की महिला संचालिका मिलरेड रेचिड बहुत सख्त है, इस पर आरपी मेकमर्फी यहां के मरीजों की आवाज उठाता है। बैठक में आगे के कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रणव शर्मा, सौरभ अग्रवाल, डॉ चंचल दिव्या, मोहित, डॉ हिना कैथ, ईभा गर्ग, पूजा बंसल आदि मौजूद रहे।
Leave a comment