
इंडियन क्लब, सुभाष पार्क में आयोजित प्रेस वार्ता में फिल्म के निर्माता रंजीत सामा (अब तक 13 फिल्म बना चुके) ने बताया कि फिल्म डेढ़ घंटे की जिसकी शूटिंग आगरा में की जाएगी। इस मौके पर विधायक योगेन्द्र उपाध्याय ने फिल्म के टाइटल सोंग का विमोचन भी किया, जिसे अपनी आवाजा से सजाया है अरविन्दर सिंह ने। फिल्म के निर्देशक हेमन्त वर्मा व संगीत निर्देशक व गीतकार पं. दिलीप ताहिल हैं। लीड रोल में यानि हेमू कलानी की भूमिका में नजर आएंगे अनंत भारद्वाज। नायिका मल्लिका कुमारी व अन्य कलाकारों में अनिल जैन, उमाशंकर मिश्रा, काजल वर्मा, शोमा जैन, राजमनवानी, होंगे।
रंजीत सामा ने फिल्म के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देश को आजादी दिलाने के लिए शहादत का दौर बहुत लम्बा था। जिसमें हम कुछ ही शहीदों के नाम जानते हैं। हेमू कलानी ऐसे शहीदों में जो देश को आजादी दिलाने के लिए नींव की ईंट थे। आज के वक्त में जब देश में भारत माता और वंदे मातरम जैसे वाक्य बोलने पर बहस छिड़ी हुई है, ऐसे में यह फिल्म बताएगी कि किस तरह उस दौर में हर वर्ग और धर्म के लिए भारत माता का क्या महत्व था। उन्होंने कहा कि देश वही तरक्की करता है जहां लोगों में देश के प्रति सम्मान भाव होता है। इस मौके पर जितेन्द्र त्रिलोकानी, अशोक जैन (डॉ. सोप), वासू, संजय गोयल, हेमंत भोजवानी, कमल चौधरी, जितेन्द्र भोजवानी, गिरधारी लाल, भारत होतवानी, जुमानी, वेदभूषण मल्होत्रा आदि उपस्थित थे।
कौन थे हेमू कलानी
विधायक योगेन्द्र उपाध्याय व जितेन्द्र त्रिलोकानी ने हेमू कलानी के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हेमू कलानी ने किशोरावस्था में अपने साथियों के साथ मिलकर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के लिए आग्रह किया। 1842 में उन्हें गुप्त जानकारी मिली कि अंग्रेजी सेना की हथियारों से भरी रेलगाड़ी रोहड़ी शहर से होकर गुजरेगी। उन्होंने अपने साथियों के साथ गुप्त रूप से रेल की पटरी को अस्त व्यस्त करने की योजना बनाई। परन्तु सूचना अंग्रेजों तक पहुंच गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके बाकी साथी फरार हो गए। कोर्ट में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। सिंध के गणमान्य लोगों के पेटीशन दायर करने पर हेमू कलानी के सामने फांसी न देने के बदले उनके साथियों के नाम बताने का विकल्प रखा गया। लेकिन हेमू कलानी ने अपने साथियों का नाम बताने के बजाय फांसी के फंदे को चूमा और 23 मई 1823 में जन्में हेमू को 21 जनवरी 1843 फांसी दे दी गई।
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