आगरालीक्स…आगरा के सक्षम 22 साल की उम्र में बने आईएएस. कांची सिंघल ने भी हासिल किया मुकाम कहा—सफलता पानी है तो सोशल मीडिया से दूर रहो. पूरी स्टोरी में जानिए इनकी सफलता का मंत्र
सफलता हासिल करनी है तो कई चीजों को इग्नोर करना पड़ता है और अपनी मंजिल को पाने के लिए पूरे मन के साथ जुड़ना पड़ता है. संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में आगरा के सक्षम गोयल ने 27वीं रैंका हासिल की हे. 22 साल की उम्र में सक्षम आईएएस बन गए हैं और शहर का नाम रोशन किया है. खास बात ये है कि सक्षम ने यह उपलब्धि पहली बार में ही हासिल की है. वहीं कमला नगर की रहने वाली कांची सिंघल ने 223वीें रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है. इन दोनों के अलावा सैया के रहने वाले टीकम वर्मा की भी 373वीं रैंक आई है. इन तीनों में कॉमन सिर्फ इतना है कि तीनेां ने मन लगाकर अपने लक्ष्य को पाया है. इनका मानना है कि अगर सफलता हासिल करनी है तो सोशल मीडिया से आपको दूर रहना ही होगा. तीनों के सफलता की कहानी जानिए:—

आगरा के सेंट कानरेड के छात्र सक्षम की 27 वीं रैंक
यूपीएससी सिविल सेवा में आगरा के सक्षम गोयल की 27 वीं रैंक आई है. सी -35 एंथम कॉलोनी सेक्टर 15 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा निवासी अमित गोयल के बेटे सक्षम को पहले ही प्रयास में सफलता मिली है. सक्षम गोयल ने सेंट कानरेडस इंटर कॉलेज से 10 वीं की, इसके बाद डीपीएस वसंत कुंज से 12 वीं और 2020 में सेंट स्टीफन कालेज दिल्ली से बीए की. सक्षम के पिता अमित गोयल पावर ग्रिड में कार्यरत हैं, उनकी मां डॉ. छाया गोयल और बड़े भाई शुभम गोयल का आगरा में ही इम्पोर्ट का कारोबार है, जबकि सक्षम के दादा सुधीर कुमार रेलवे में डीआरएम के पद से रिटायर हुए हैं.
पहले प्रयास में मिली सफलता
सक्षम गोयल ने डीपीएस से इंटरमीडिएट करने के बाद सिविल सर्विसेज को लक्ष्य बनाया, इसके लिए बीए में प्रवेश लिया. राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र के साथ बीए किया और सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए. इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया से लगातार दूरी बनाई रखी और यही कारण है कि सक्षम का पहले प्रयास में चयन हुआ है. उनकी 27 वीं रैंक है, इससे वे आईएएस बन जाएंगे. सक्षम के अनुसार उनहोंने यूपीएससी की तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं ली. उन्होंने आनलाइन इसकी तैयारी की और सेल्फ स्टडी की. वो दिन में 6 से 8 घंटे ही पढ़ाई करते थे. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि लगातार छह घंटे पढ़ना है, जब उनका मन होता था तब पढ़ते थे और जब नहीं मन होता था तो नहीं पढ़ते थे.

कांची की सफलता की कहानी
कमला नगर की रहने वाली कांची सिंघल ने भी सफलता हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है. उन्होंने यूपीएससी में तीसरी बार में सफलता पाई है. उनहोंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षा के लिए स्टूडेंट्स लक्ष्य तो बना लेते हैं लेकिन उसे पूरा करने में लगन और धैर्य की भी जरूरत होती है. कई बार सफलता हाथ नहीं लग पाती लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हार मान लिया जाए. उन्होंने कहा कि सेल्फ स्टडी और मॉक टेस्ट से तैयारी में काफी मदद मिली. वह औसतन 10 घंटे पढ़ाई करती थीं. बाकी के समय में सामान्य जीवन. सोशल मीडिया से दूरी रही. पिता अतुत सिंघल और मां श्रुति सिंघल का कहना है कि समान मौका मिले तो बेटियां भी परिवार का नाम रोशन करती हैं. यह कांची ने साबित कर दिया है.
सैंया के टीकम वर्मा ने भी किया नाम रोशन
इधर सैंया के ग्राम जौनई में रहने वाले कैप्टन विनोद वर्मा र्के बेटे टीकम सिंह वर्मा ने भी यूपीएससी परीक्षा 2021 में 373वीं रैंक हासिल की है. टीकम वर्मा ने इससे पहले वर्ष 2019 की यूपीएससी परीक्ष्ज्ञा में 391वीं रैंक पाई थी. टीकम इस समय आईपीएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं. पिता कैप्टन विनोद वर्मा सेना से रिटायर्ड हैं और दिल्ली में रहतेह ैं. मां संजू देवी गृहिणी हैं.